सैयद ख़ालिद कैस समूह सम्पादक @8770806210
भोपाल । सारा प्रदेश दलित एवं सवर्ण समाज के धरनों , आंदोलनों , विरोधों की आग मेँ झुलस रहा । कॉंग्रेस से अधिक सत्ताधारी भाजपा के लिये चुनावी समर मेँ सवर्णो के विरोध का सामना करना पड़ रहा । शिवराज सिँह चौहान और उनके मंत्री , विधायकों के लिये जिस प्रकार सवर्ण आन्दोलन के विरोध की बलिवेदी पर चढ़ना पड़ रहा हैं उसकी किसी ने सपनो मेँ भी कल्पना नही की होगी । शिवराज की घटती लोकप्रियता , जन आशीर्वाद यात्रा का खुलकर विरोध , जनता की बेरुखी यह साबित कर रही हैं कि एट्रोसिटी एक्ट भाजपा के लिये गले की हड्डी बन गई हैं जो उगल सकते हैं और न निगल सकते हैं !

सपाक्स संगठन के उदय तथा बढ़ती लोकप्रियता एवं राज्य सरकार एवं विपक्ष के घोर विरोध के बीच पिछले कुछ दिनो मै जो मकाम बनाया है, उस से सरकार के माथे पर बढ़ती लकीरों को मिटाने के उद्देश्य से कल रविवार को भेल दशहरा मैदान मै पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति. जनजाति संयुक्त मोर्चा के 65 संगठनो ने करीब 5 लाख लोगो के साथ एट्रोसिटी एक्ट का समर्थन करते हुये शिवराज सरकार को राहत पहुँचाने का कार्य किया है ।
सम्मेलन मै शामिल 60 से अधिक वक्ताओ द्वारा खुले मंच पर यह खुली चेतावनी दी थी कि इस विधानसभा चुनाव मै किसी सवर्ण उम्मीदवार को वोट नही देंगे ,
एट्रोसिटी एक्ट में छेड़छाड़ बर्दाश्त नही करेंगे । करीब 6 घंटे चली इस सभा में आरक्षण एट्रोसिटी एक्ट के अलावा भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया गया। पूर्व आईएएस लखनलाल और पूर्व आईएफएस आजाद सिँह डबास की मौजूदगी मै प्रदेश भर से आये लोगो ने भारी नारे बाजी की ।
अब सवाल ये उठता है कि सत्ताधारी भाजपा और विपक्षियों कॉंग्रेस के लिए एक और सवर्ण और पिछड़ा वर्ग समाज का नेतृत्व करने वाले संगठन सपाक्स का विरोध और दूसरी और वर्षो से सरकार के साथ कदमताल करने वाले संगठन अपाक्स जो कि अनुसूचित जाति , जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग का नेतृत्व करता है तथा जिस संगठन कि पृष्ठभूमि, रिटायर्ड या वर्तमान अधिकारियो के इर्द गिर्द है । उनकी चेतावनियों के बीच इस विधान सभा चुनाव मै भाजपा एवं विपक्षियों कॉंग्रेस को एस सी . एस टी , पिछड़ा वर्ग तथा सामान्य को बांटने का प्रयास किस हद तक सफल होता है ।

परन्तु यह स्पष्ट है कि पिछले 70 साल मै दलितो और समाज के बीच कटुता की खाई को वर्तमान भाजपा सरकार ने इतना गहरा कर दिया है जिसको भरना वर्तमान परिदृश्य मै मुश्किल होगा।
