भोपाल – केंद्र में जबसे मोदी सरकार आई है या उत्तर प्रदेश में योगी सरकार सबसे ज़्यादा हमले मदरसों पर हुये है कभी राष्ट्र गान के नाम पर , कभी मदरसों को आतंकवाद का अड्डा कहकर तो कभी मदरसों की गतिविधियों पर निगरानी के लिये सीसी टीवी केमरे लगाने की पहल । हमेशा मदरसे को ही टारगेट करने वाली भाजपा सरकारों को मदरसे आसामाजिक दिखते हैं और असामाजिक गतिविधियों में शामिल राष्ट्र भक्त ।
ताज़ा मामला मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड द्वारा उस आदेश की चर्चा है जिसमें बोर्ड द्वारा आदेशित किया गया है कि प्रदेश के सभी मदरसों में 15 अगस्त को झंडा फहराने और राष्ट्रगान समेत दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाने के फोटो बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जाये।
यहाँ सवाल उठता है कि क्या सरकार योगी मोड पर है जो मदरसों के लिये यह नीति बनाईं है । क्या सरकार प्रदेश के समस्त शासकीय /अशासकीय /कान्वेंट स्कूलों से भी यही आशा रखती है कि वह कार्यक्रमों के फ़ोटो शासन को दें । क्या प्रदेश में संचालित समस्त शिशु विहार , सरस्वती विद्या मंदिर भी इस नीति के तहत आयेंगें ! यदी नही तो मदरसों को सन्देह के घेरे में क्यो लिया जा रहा । क्या यह तुष्टीकरण कि नीति नही । क्या यह मदरसों को टार्गेट करनें का माध्यम नही । सरकार जानती है कि सैकड़ों मदरसे मस्जिदों में संचालित है , इस प्रकार मस्जिदों को भी टारगेट किया जाना निंदनीय है ।
मदरसा बोर्ड का अध्यक्ष बैचारा सीधा आदमी है जिसे सरकार जैसा चाहती है इस्तेमाल करतीं है , उसमें खुद फ़ैसले लेने और लिये गये फैसलों के दूरगामी परिणामों को समझने की सलाहियत नही है , तभी तो सरकार ने चुना है । खैर बात हो रही है मदरसों को टारगेट की तो क्या सरकार आरएसएस के प्रशिक्षण शिविरों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का दम रखतीं है , क्या दुर्गा वाहिनी के प्रशिक्षण शिविरों की गतिविधियों के फोटो सरकारी वेबसाइट पर डलवाने का दम है शिवराज में ! ज़वाब होगा नही ? क्योंकि वहां तो धार्मिक , सांस्कृतिक गतिविधियां होती है , सारी आसामाजिक गतिविधियां तो मदरसों में होती है । तभी तो कभी सीसीटीवी कैमरे से निगरानी तो कभी गतिविधियों के फ़ोटो उपलोड कराने के आदेश ।
ताज्जुब इस बात पर होता है कि भाजपा की मदर बॉडी आरएसएस ने देश की आज़ादी के 65 बरस तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नही फहराया , तब भी वह राष्ट्र भक्ति के वाहक और आज़ादी में हजारों की तादाद में आलिमों की शहादत , मदरसों का जंगे आज़ादी में महत्वपूर्ण योगदान होने का यह सिला दिया जा रहा है । ?
शासन के इस निर्देश पर सवाल उठने लगे हैं ।लोगों का कहना है कि 1947 में देश आजाद होने के बाद से ही लगातार मदरसों में हर साल जश्न-ए-आजादी मनाया जाता है। झंडा फहराने के बाद राष्ट्रगान भी होता है। आज इस तरह से निर्देश करने का क्या मतलब?
बहरहाल सरकार तुष्टीकरण के फुल मूड में है और नासमझ के हाथों में मदरसा बोर्ड । सरकार जैसा चाहती है , जो चाहती है करवाती है । पर यह कहने में अतिशयोक्ति नही होगी की मदरसा बोर्ड के नाम पर सरकार का यह षड्यंत्र निंदनीय है ।मदरसे आजादी से पहले से आजतक राष्ट्रभक्ति का ही पाठ पढ़ाते थे , पढ़ाते हैं और पढ़ाते रहेंगें । सरकार उनकी चिंता करे जो नफ़रत के विश्व विध्यालय चला रहे हैं ।
सैयद ख़ालिद कैस समूह सम्पादक 8770806210
