भोपाल – शिवराज सरकार मे आरंभ मप्र लोकसेवाओ के प्रदान की गारंटी अधिनियम 2010 में आमजन को प्रदत्त सेवाओं को सहज सरल सुगम बनाने का प्रयास कर दर्जनों सेवाऐं इसमे शामिल की ताकि आसानी से सेवाओं का आमजन लाभ उठा सकें , परन्तु 09 साल के इस अंतराल में यह योजना लूट का माधयम बन गई । जो आमजन के लिए सरदर्द से कम नही है ।
गौरतलब हो कि शिवराज सरकार की अधिसूचना उपरांत लोकसेवा केंद्र से खसरा , खतौनी नकल के अलावा राजस्व न्यायलय संबंधी नस्तियो , रिकार्ड रूम से संबंधित नक़ल सेवा को लोकसेवा से जोड़ दिया गया और शुरू होगया और यहीं से आरम्भ हुआ लूट तंत्र का मायाजाल ! वर्तमान कमलनाथ सरकार का ध्यान अब तक इस और नही जाना हास्यास्पद लगता है ।
ज्ञात हो कि उक्त अधिसूचना से पूर्व नक़ल शाखा और रिकार्ड रूम से संबंधित फ़ाइलों की नक़ल 40-50 रूपये न्यूनतम से 250-300 रूपये अधिकतम राशि में प्राप्त होती थी जो अब हजारों रूपये तक की फ़ीस में मिल रही है । आवेदक को फ़ीस की रकम जानकर चक्कर आगये । यह तो एक बानगी है । अधिसूचना जारी दिनाँक के साथ भोपाल कलेक्टर ऑफिस की प्रभारी अधिकारी के आदेश दिनाँक से आज दिनाँक तक लाखों रूपये की राशि नक़ल राशि के रूप में लोकसेवा केंद्र प्राप्त कर चुका है । जो फ़ीस दस रूपये( एक आदेश )की दर से लगती थी वह अब 40रूपये प्रति पृष्ठ वसूली जा रही है ।
जनता को सुविधा देने के नाम पर आरम्भ हुआ लोकसेवा केंद्र लूट का केंद्र बन गया है । इस योजना का भी हाल ज्ञानदूत योजना तथा समाधान एक दिन योजना की भांति हो गया है । जो भ्रष्टाचार और लूट तंत्र का केंद्र बिंदु बन गए थे ।
इस फीस बढ़ोत्तरी के ख़िलाफ़ राजस्व अधिवक्ता कल्याण परिषद मप्र निरन्तर संघर्षरत है । वर्तमान कलेक्टर तरुण कुमार पिथोडे के संज्ञान में लाने पर उनके द्वारा बड़ी हुई फी में तो कमी नही की , परंतु नक़ल मिलने की समयसीमा 03दिन निर्धारित करने के आदेश अक्टूबर 2019में जारी किए थे । परंतु भ्रष्टाचार का पर्याय बना लोकसेवा प्रबन्धन कलेक्टर भोपाल के आदेश को ही मानने को तैयार नही ।
परिषद अध्यक्ष एवं आरटीआई एक्टिविस्ट सैयद ख़ालिद कैस ने बुधवार को पुनः कलेक्टर को अवगत कराया कि आपके आदेश को आपके ही अधीनस्थ नही मानते । कलेक्टर ने यह जानकर जहां एक और आश्चर्य व्यक्त किया और लोकसेवा केन्द्र प्रभारी एवं अपर कलेक्टर वन्दना शर्मा को तलब कर डाला जो नही पहुंची तो कलेक्टर ने आगामी कारवाई के लिए शिकायती आवेदन अपने पास रख लिया अब देखना यह है कि कलेक्टर जीतते हैं या लोकसेवा प्रबन्धन ? रही बात कमलनाथ सरकार की तो तबादलों से ही फुर्सत नही उसको जो शिवराज की जनविरोधी स्कीम पर रोक लगाएँ ।
@भोपाल से विशेष संवाददाता साक्षी मगरे की ख़बर ।
