भोपाल । कमलनाथ की चक्की में इन दिनों भूमाफिया , अपराधी और पिछली सरकार के संरक्षण प्राप्त सफेद पोश जमकर पिस रहे हैं । संपूर्ण प्रदेश में जारीअतिक्रमणकारियों एंव भूमाफियाओं के ख़िलाफ़ पुलिस -प्रशासन का अभियान अपने चरम पर है , और उसका असर व्यापक तौर पर पूरे प्रदेश में देखा जा रहा है । जहां एक और अपराधियो , अतिक्रमणकारियों एंव भूमाफियाओं में भय का माहौल है वहीं उनको संरक्षण देने वाले भी बुरी तरह बैचैन नज़र आ रहे हैं , इसका जीता जागता प्रमाण गत दिनों दिखा जब पूर्व मंत्री और भाजपा नेता ने ताओ में आकर इंदौर जलाने की धमकी दे डाली और धारा 144 का उल्लंघन कर इंदौर कमिश्नर ऑफिस को घेर बैठे , नतीजा यह निकला कि भाजपा नेता सहित इन्दौर सांसद , भाजपा विधायक के साथ साथ लगभग 350लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज होगया ।
इंदौर में सांझा लोक स्वामी जीतू सोनी का एपिसोड अभी बंद भी नही हुआ था कि पुलिस प्रशासन ने राजधानी भोपाल में भी पत्रकारों को घेर लिया । सबसे पहले निशाने पर आया जुन्नार देव छिंदवाड़ा का किसी जमाने में अपराधी रहा भोपाल का चर्चित पत्रकार । जिसे शिवराज सरकार ने खूब नवाजा और बना डाला राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार । सुना है पत्रकार साहेब का संबन्ध “हनी ट्रेप ” एपिसोड से भी जुड़ा हैं ।
खैर ! तालों की नगरी में तो यह ख़ूब उछल रहा है कि पत्रकार महोदय पिछली सरकार ने मंत्री -संतरी , आई पी एस /आई ए एस और दीगर सफेद पोश नौकरशाहो को “हनी “भी सप्लाई करते थे और “ट्रेप “भी किया करते थे । उनकी जद में पिछली सरकार के सरकार के मंत्री -संतरी , आई पी एस /आई ए एस और दीगर सफेद पोश नौकरशाह भी फंसे पड़े थे । मगर कमलनाथ सरकार में यह साहेब लपेटे में आगये और उनपर पिछले एक माह में आपराधिक प्रकरणों की बरसात होगई , मियाँ खुद तो फ़रार हो गए पीछे पड़ गई पुलिस , इनाम भी घोषित होगया और ज़िला बदर की तैयारी अलग । पत्रकार साहब जिन पुलिस मित्रो से गलबहिया करते थे आज वहीं दोस्त , दुश्मन बन गए । वहीँ
राजधानी में ही एक दूसरे पत्रकार भी कमलनाथ की चक्की में फंसे पड़े हैं । एक पत्रकार संगठन के मुखिया को कॉंग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा के चरित्र चित्रण की खबरें ले डूबी । मालूम हो कि 62वर्षीय पत्रकार साहब ने शोभा ओझा पर जमकर लिखा नतीजा हुआ उन्होने सायबर थाने में एफआईआर करा दी । पुलिस ने मौके की नजाकत देखी और वृद्ध पत्रकार के ख़िलाफ़ ज़िला बदर केस ठोंक दिया । शुक्रवार को कलेक्टर न्यायालय में विशेष तौर पर चार प्रकरणों की सुनवाई नियत थी । जिसमें अधिमान्य पत्रकार रहे श्रीमान , पत्रकार संगठन के मुखिया और शोभा ओझा प्रकरण के आरोपी , तीसरा मामला था कुख्यात बदमाश का , जिसकी भोपाल सहित रायसेन की संपत्ति को कमलनाथ सरकार ने ज़मीन दोज कर डाला । चौथा मामला किसी अपराधी का नही वरन एक सामाजिक व्यक्ति का है जो स्कूल संचालित करता है और जिसे एमपी नगर वृत के एसडीएम रहे एक अधिकारी से पंगा लेना भारी पड़ गया । अधिकारी ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर उस व्यक्ति को भारी नुकसान तो पहुंचाया ही वरन ज़िला बदर जैसी कारवाई में भी फंसा दिया । शुक्रवार को उक्त व्यक्ति अपने परिवार सहित कलेक्टर कोर्ट में मौजूद था । परिवार की महिलाओं ने उक्त अधिकारी पर 35लाख रूपये की मांग का और मांग पूरी नही करने पर मकान ज़मीन दोज करने के संगीन आरोप लगाए। यह गौरतलब हो कि इसी मामले में कलेक्टर भोपाल ने नाराज़गी के बाद उक्त एसडीएम को भी निपटा दिया है, और वह लूप लाइन में आगये ।
अब चारो मामले सोमवार को फिर कलेक्टर कोर्ट में पेश होंगे और सोमवार को ही कलेक्टर भोपाल दो पत्रकारों सहित कुख्यात बदमाश और एक स्कूल संचालक के ज़िला बदर मामलों पर सुनवाई करेंगे । देखना यह है कि कलेक्टर दंडाधिकारी का धर्म निभाते हैं या शासकीय नौकरशाह बनकर फैसला लेते हैं !
@सैयद ख़ालिद कैस -8770806210
