दिल्ली-7 दिसम्बर को दिल्ली में पीएम नरेन्द्र मोदी ने करीब 200 करोड़ रुपए की लागत वाले बीआर अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केन्द्र का उद्घाअन किया। इस केन्द्र में अब भारत के पहले कानून मंत्री भीमराव अम्बेडकर के जीवन पर रिसर्च किए जा सकेंगे तथा उन पर गोष्ठियां आदि भी हो सकेगी। केन्द्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक बड़ा सभागार तथा दो छोटे ऑडोटोरियम बनाए गए हैं। इस केन्द्र को बनाने का फैसला वर्ष 1992 में लिया गया था, लेकिन अम्बेडकर के नाम पर वोट मांगने वाले अधिकांश नेताओं ने या तो मूर्तियां लगवाई या फिर जगह-जगह पत्थर के हाथी खड़े किए। किसी ने भी इस केन्द्र के निर्माण में रूचि नहीं दिखाई। लेकिन अप्रेल 2015 में पीएम मोदी ने इस केन्द्र का शिलान्यास किया और आज 7 दिसंबर 2017 को केन्द्र का उद्घाटन भी कर दिया। अब आलोचक इस उद्घाटन को भले ही गुजरात चुनाव से जोड़कर देंखे, लेकिन यह हकीकत है कि बीआर अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केन्द्र मात्र 20 माह में बनकर तैयार हो गया। जो केन्द्र 25 वर्षों से लटका पड़ा था, वह 20 माह में तैयार होना मायने रखता है। इस केन्द्र के माध्यम से बाबा साहब की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार ही होगा। युवा पीढ़ी खासकर पिछड़े वर्ग के युवा बाबा साहब के बारे में जान सकेंगे। यानि बाबा साहब के नाम को आगे बढ़ाने के लिए यह एक ठोस काम हुआ है। अब यदि इसका फायदा गुजरात चुनाव में मोदी लेते हैं तो किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। मोदी ने अपना भाषण भी गुजरात चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही दिया। मोदी का कहनारहाकि उनकी सरकार तो बाबा साहब की शिक्षाओं पर ही चल रही है। मुद्रा योजना में 4 लाख करोड़ के लोन से लेकर जन-धन, दुर्घटना बीमा, उज्ज्वला योजना में रसोई गैस का सिलेंडर देना आदि सभी पिछड़े वर्ग के लोगों को सुविधा मिली है। मेरी सरकार ने जो कहा वो किया। मेरा न्यू इंडिया का नारा बाबा साहब का सपना ही है। आज टेक्नोलॉजी का लाभ भी पिछड़े वर्ग के लोगों को मिल रहा है। मैंने तो सरकार के एप का नाम भी भीम एप रखा है।
