भारत की राजनीति में कांग्रेस ने लंबे समय तक राज किया। राजनीति के हर दाँवपेंच, छलकपट का सहारा कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए किया। लेकिन 2004 से 2014 के एक दशक के राज में कांग्रेस कुछ ज़्यादा ही निष्ठुर होती चली गई। सत्ता के लिए सिर्फ मुसलमानों को बेहिसाब सुविधाएं, जालीदार टोपियाँ और चौकड़ीदार गमछे डाले कांग्रेस और बाक़ी सेकुलर दलों ने भारत की बहुसंख्यक जनता हिंदुओं को दोयम दर्जे का साबित करने में कोई कसर बाक़ी नहीं रखी।
लेकिन इसी बीच नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और उनके मुख्यमंत्री बनते ही गुजरात को भूकंप जैसी भीषण विभीषिका का सामना करना पड़ा और गोधरा कांड के बाद पूरा गुजरात दंगों की आग में झुलस गया। गोधरा कांड की तीखी प्रतिक्रिया गुजरात मे हुई और इसी के साथ नरेंद्र मोदी मुस्लिम प्रेमी काग्रेस और बाकी सेकुलर दलों की आंखों की किरकरी बन गए। इशरतजहां के एनकाउंटर ने इस नफ़रत को और बढ़ा दिया। कांग्रेस ने इसके लिए मोदी शाह को बदनाम करने, बर्बाद करने, रोकने के लिए हर दाँवपेंच, हर छलकपट का सहारा लिया। यहाँ तक कि कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों की रचना की और कई निर्दोषों को अपराधी बनाकर उन्हें अंतहीन यातनाएँ दीं।
लेकिन नियति को भी कुछ और ही मंजूर था, मोदी शाह कांग्रेस की तमाम तिकड़मों से जूझते रहे और भाजपा ने 2014 में नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बावजूद कांग्रेस ने ‘मौत का सौदागर’ ‘ज़हर की खेती’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री मोदी के लिए किया।
मई 2014 में जनता का जब फैसला आया तो वो कांग्रेस और सभी सेकुलरों के लिए चौंकाने वाला था। देश की जनता ने पूर्ण बहुमत से मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया।
इसके बाद से मोदी हर उस राह, हर संस्था, हर नीति को खत्म करते जा रहे हैं जो देश की प्रगति रोके खड़ी थी। कांग्रेस के हाथों से राज्यों की सत्ता भी जाती जा रही है।
इन सबके बीच मोदी ने वो किया जो इसके पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया था। वो था मंदिर मंदिर जाना, पूजा अर्चना करना, मंच से जय श्रीराम के नारे लगाना, विश्व के नेताओं को गीता भेंट करना, जापान के प्रधानमंत्री को वाराणसी में गंगा आरती में शामिल करना, दुबई के शेख से मंदिर के लिए ज़मीन हासिल करना, विश्व में भारत की साख को ऊँचा उठाना, सर्जिकल स्ट्राइक करना, चीन की आँखों में आँखें डालकर बात करना, चीनी राष्ट्रपति को झूले में झुलाना वो भी दिल्ली में नहीं बल्कि अहमदाबाद में, चीन को डोकलाम पर पीछे हटने को मजबूर करना, नोटबन्दी जैसा साहसिक निर्णय लेना, GST को लागू करना, देशहित में तमाम फैसलों को लंबी सरकारी प्रक्रिया से निकालकर तुरंत मंजूरी देना और काम शुरू करना, सबसे बड़ा काम कश्मीर में सेना को खुली छूट देना जिसका नतीजा ये हुआ कि कश्मीर में पत्थरबाज़ी बंद हो गई और 200 आतंकियों को जहन्नुम भेज दिया गया, सीमा पार से फायरिंग में ज़बरदस्त गिरावट, कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को दो कौड़ी का बना दिया जिन्हें कांग्रेस सिर माथे पर लिए घूमती थी।
कभी सिर्फ मुस्लिम नेताओं के साथ गलबहियां करने वाले सेकुलर नेता आज भूले से भी जालीदार टोपी नहीं पहन रहे न ही इफ़्तार पार्टियाँ आयोजित कर रहे, मंदिर मंदिर भटक रहे, ईसाई होकर भी खुद को हिन्दू साबित करने पर तुले हैं। गुजरात चुनावों में भूले से भी गुजरात दंगों का ज़िक्र नहीं कर रहे। मोदी की हर चाल से हैरान परेशान कांग्रेस और विपक्ष कभी जेएनयू के देशद्रोही छात्रों के साथ, कभी दादरी, रोहित वेमुला, असहिष्णुता जैसे मुद्दों को उठाने को मजबूर है लेकिन कहीं भी सफलता हाथ नहीं लग रही है।
अकसर कई लोग शिकायत करते हैं कि मोदी भाजपा ने हिंदुत्व के लिए क्या किया है तो उन्हें ये समझना होगा कि ये सेकुलर नेता आज जो मंदिर मंदिर भटक रहे हैं जो आज पूरा सोशल मीडिया आये दिन जय श्रीराम के नारे लगाता है, तो ये किया है मोदी ने। आज देशद्रोही, हिन्दू विरोधी संकट में हैं और वो पुरज़ोर कोशिश में लगे हैं किसी भी तरह मोदी को बदनाम और बेदखल किया जाय, लेकिन दिनोंदिन उनकी राह मुश्किल होती जा रही है।
