प्रदेश मे विधानसभा चुनाव के निकट आते ही शिवराज सिँह चौहान की बैचैनी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है । चित्रकूट मे इज़्ज़त गँवा चुकी भाजपा के लिये मुँगावली और कौलारस उप चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ था , अपनी दिन ब दिन खोई प्रतिष्ठा को बचाने के लिये शिव -राज और उनके गणों ने ऐडी चोटी का जोर लगा दिया था । घोषणा वीर मामा ने घोषणाओं का पिटारा खोल दिया था , परँतु सब बेकार साबित होगया जब चुनाव नतीजो ने मुँह पर कालिख पोत दी , रही सही कोर कसर ऐसिड पीडाता से बलात्कार का प्रयास और फिर बेटी बचाओ का नारा पीटने वाले ने ही अपनी सगी रिश्तेदार के साथ दुराचार कर डाला । जो भाजपा अपनी बैटी न बचा सकी वह पराई कन्या क्या बचायेगी । 
खैर ! शिवराज का उतरता तिलस्म भाजपा के लिये खतरे की घड़ी है । कौलारस और मुँगावली चुनाव से पूर्व हाई कमान ने खामोशी से यह सन्केत दिये थे कि एक सीट हारे तो नंदू भय्या की छुट्टी और दोनो हारे तो शिवराज की छुट्टी !
अब देखना यह है कि प्रदेश मे कॉँग्रेस क्षत्रपों कमलनाथ , ज्योतिरादित्य , अजय राहुल और pcc चीफ यादव की महनत और मामा के टूटते तिलस्म के बाद इस हार की कालिख किसके मुँह पर पुतेगी ।
इन्तेज़ार है उस पल का जब जनता को घोषणा वीर से मुक्ति मिलेगी या ठीकरा किसी और के सिर फूटेगा । कॉँग्रेस की भी गुटबाजी यदि कायम रही तो 2018के आखिर मे जीत का ताज ख्वाब ही रह जायेगा । इधर नर्मदा परिक्रमा को निकले कॉग्रेस के सिपहसलार दिग्गी राजा को मिले समर्थन ने मोदी की नींद और शिवराज का चैन छीन रखा है , दिग्गी के बढ़ते कद से कॉंग्रेस को लाभ के आसार है । अब देखते हैं जनता जनार्दन की क्या मँशा है ।
स्वंत्रत पत्रकार एस खालिद कैस
