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गंगा विसर्जन के लिए 2 साल से इंतजार में हैं महिपाल की अस्थियां
छतरपुर /शासन गरीबों के लिए भले ही कई योजना चलाती हैं मगर धरातल पर आकर यह कैसे दम तोड़ती है इसका उदाहरण मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला मुख्यालय पर देखने को मिला,
दरअसल 27-10-2018 को छतरपुर सर्किट हाउस के पास झोपड़ियों में रहने वाले महिपाल आदिवासी जो कि सिल पत्थर का काम करता था का टीवी की बीमारी के चलते निधन हो गया था और उसका अंतिम संस्कार उसके परिवार ने किया था । गरीबी के चलते महिपाल आदिवासी की अस्थियों का विसर्जन आज तक इलाहाबाद में नहीं हो सकता और उसकी अस्थियां आज भी बिजावर नाका स्थित मुक्तिधाम पर एक वृक्ष की टहनी पर टगी है । वो गंगा नदी में विसर्जन के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का इंतजार आज तक कर रही हैं । महिपाल के परिवार में उसकी पत्नी व तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं वह उसका छोटा भाई व अन्य सदस्य मौजूद हैं।
