छतरपुर से खेमराज चौरसिया की विशेष रिपोर्ट
MP/छतरपुर/महाराजपुर। एक तरफ जहाँ कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों को दीपावली का उपहार देते हुऐ कल एक आदेश निकालकर 24-25 अक्टूबर को वेतन भत्ते , पैंशन आदि देयको के भुगतान की तत्काल व्यवस्था की है वहीं दूसरी और छतरपुर ज़िले के रहवासियों को इस दिवाली पर राशन से वंचित होना होगा , यह व्यवस्था में कमी से अधिक राजनैतिक साज़िश की और इशारा कर रही है जो कमलनाथ सरकार को बदनाम करने का हथकंडे के रूप में देखा जा रहा है ।
वैसे तो दीपावली आते ही सरकार हो या समाजसेवी या प्राइवेट कंपनी सभी शुभकामनाओं के साथ मिठाई गिफ्ट और देते हैं। लेकिन छतरपुर जिले में लापरवाही का आलम इसी बात से लगाया जा सकता है कि अति गरीबी , गरीबी एवं सामान्य को मिलने वाला राशन, राशन दुकानों तक नहीं पहुंचा गरीब जहां परेशान है, वहीं कुछ को तो खाने को भी नहीं कुछ नसीब नही हो रहा है ।
इस संबंध में जब हमने जिला खाद्य अधिकारी स्वाति जैन से फोन चर्चा करनी चाही उन्होंने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ते हुऐ सप्लाई के टेंडर ना होने की दुहाई दे डाली और विभाग द्वारा इस बाबत बार बार पत्राचार की बात कह इतिश्री कर ली । खाद्य विभाग के जवाबदार सिर्फ कार्यालय में बैठकर ही कागजी घोड़े दौड़ा रहते और अब जवाबदारी सरकार को सुनिश्चित करनी होगी। मामला जनहित की है और सरकार की साख की भी है । जो अधिकारी अपने अधीनस्थ से आदेशों का पालन नहीं करा पाते उन्हें क्या सीट पर बैठने का अधिकार है, या नहीं यह तो समय ही बताएगा । लेकिन जिन गरीबों को दीपावली के दिन भी ख़ाली पेट सोना पड़ेगा वो सरकार को किस नजर से देखेंगे यह सरकार ही जाने।
छतरपुर की महाराजपुर तहसील कि दुकानों के अलावा जानकारी मिल रही है कि जिले में भी खाद्यान्न सप्लाई नहीं हुआ है। यह एक ज्वलनशील मुद्दा है कि कमलनाथ सरकार को बदनाम करने या राजनैतिक द्वेषवश तो दीपावली के त्यौहार पर गरीबों के मुंह से निवाला छीनने वाला खाध्य विभाग किस हद्द तक ज़िम्मेदार है और यदि ज़िम्मेदार है तो कौन उनको दण्डित करेगा ।
