छतरपुर। 27 वर्षीय महिला को मिट्टा का तेल डालकर जिंदा जलाने के मामले मे कोर्ट ने फैसला दिया है। कोर्ट ने मृतिका की सास और ननद को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि रामदेवी विश्वकर्मा की शादी हिम्मतपुरा में रहने वाले हरिप्रसाद विश्वकर्मा के साथ हुई थी। रामदेवी की सास भुमानीबाई और ननद लक्ष्मी उससे छोटी-छोटी बातो को लेकर झगड़ा करती थी। 24 अप्रेल 2016 को दिन 2 बजे सास और ननद ने मिलकर रामदेवी के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। रामदेवी के चिल्लाने की आवाज सुनकर उसका पति और गांव के लोगा आ गए। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले गए। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस मृतिका के पति हरि और सास, ननद के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हे गिरफ्तार किया। मामला गंभीर प्रकृति का होने से तत्कालीन एसपी ललित शाक्यवार ने इस मामले को जघन्य एवं सनसनी खेज मामले में चिंहित किया। और तत्कालीन एएसपी नीरज पांडे और एडीपीओ केके गौतम ने लगातार इस मामले की माॅनीटरिंग एवं समीक्षा की। पुलिस ने विवेचना के बाद मामला कोर्ट में पेश किया।
न्यायाधीश नोरिन निगम की कोर्ट ने सुनाई सजाः
अभियोजन की ओर से डीपीओ एसके चतुर्वेदी ने पैरवी करते हुए सभी गवाह एवं सबूत कोर्ट के सामने पेश कर आरोपीगण को कठोर सजा देने की अपील की। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश नोरिन निगम की कोर्ट ने फैसला दिया है कि 27 साल की मृतिका जिसकी तीन संताने है, को जिंदा जला कर हत्या की है। ऐसे अपराध में उदारता बरतना न्याय की मंशा नही है। कोर्ट ने सास भुमानीबाई और ननद लक्ष्मी को आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावास के साथ तीन-तीन हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मृतिका के पति हरि को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
दुराचार करने पर सात साल की कठोर कैद
छतरपुर। 21 वर्षीय युवती के साथ दुराचार करने और घर में घुसकर कट्टे की नोक पर शादी करने के लिए दवाब बनाने के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। न्यायाधीश नोरिन निगम की कोर्ट ने आरोपी को सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि 21 साल की फरियादिया ने बमीठा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 15 जुलाई 2015 को वह अपने घर पर अकेली थी। सुबह करीब 9 बजे दर्शन रैकवार निवासी टटम उसके घर के अंदर आ गया। दर्शन ने उससे कहा वह उसके साथ चले वह उससे सादी करना चाहता है। जब उसने मना किया तब दर्शन ने कट्टा उस पर अड़ा दिया और उसे पकड़कर कमरे में ले गए। उसी दौरान फरियादिया का पिता आ गया। जिसे देखकर दर्शन ने कमरे का अंदर से ताला बंद कर दिया और बोला यदि उसके साथ सादी नही करोगी तो पहले वह फरियादिया को गोली मार देगा और फिर खुद को गोली मार देगा। हल्ला होने पर गांव को लोग मौके पर आ गए। मौजूद लोगों ने फरियादिया को बड़ मुश्किल से दर्शन के चंगुल से छुड़ाया। दर्शन कट्टा दिखाता हुआ मौके से भाग निकला। इस घटना के पहले आरोपी ने फरियादिया के साथ दुराचार की घटना को अंजाम दिया था। पुलिस आरोपी दर्शन को गिरफ्तार किया और मामला कोर्ट में पेश किया। अभियोजन की ओर से एजीपी प्रवीण द्विवेदी ने पैरवी करते हुए सभी गवाह एवं सबूत कोर्ट के सामने पेश किए। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश नोरिन निगम की कोर्ट ने आरोपी दर्शन को आईपीसी की धारा 376(1) में सात साल की कठोर कैद तीन हजार रुपए जुर्माना, धारा 450 में पांच साल की कठोर कैद एक हजार रुपए जुर्माना, धारा 452, 506 बी में तीन-तीन साल की कठोर कैद एक-एक हजार रुपए जुर्माना और धारा 342 में 6 माह की कठोर कैद एवं आम्र्स एक्ट की धारा 25/27 में तीन साल की कठोर कैद के साथ एक हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है।
@खेमराज चौरसिया की रिपोर्ट
