।अशफाक कायमखानी।
जयपुर-भारतीय मुस्लिम धार्मिक नेताओं का झुकाव अब भारतीय राजनीति को ठीक दिशा की तरफ ले जाने के लिये सीधे तौर पर राजनीतिक दल बना कर या फिर पहले से बने सेक्यूलर विचारधारा वाले राजनीतिक दलो मे शामिल होकर चुनावी संघर्ष मे तपकर नेतृत्व देने की तरफ इशारा मिलता नजर आ रहा है।
हालांकि भारत मे मोजूद जमात-ऐ-इस्लामी हिन्द जैसे धामिर्क संगठन द्वारा बनाई राजनीतिक पार्टी “नेशनल वेलवेयर पार्टी” को भारत के मुसलमानों ने सीरे से खारिज करते हुये उसकी कच्ची मोत होने की तरफ धकेल दिया है। जबकि मुस्लिम लीग केरल के एक इलाके तक सिमित है, तो धार्मिक नेता मोलाना बदरुद्दीन अजमल द्वारा सेकयूलर विचारधारा पर बनाई राजनीतिक पार्टी ने आसाम की धरती पर होने वाली राजनीति मे कुछ करके जरुर दिखाया है। मरहुम सुल्तान सलाऊद्दीन ओवैसी द्वारा गठित पार्टी को उनके पुत्र सांसद असदुद्दीन ओवैसी हैदराबाद से बाहर निकाल कर भारत के अन्य हिस्सों मे विस्तार देने मे लगे हुये है। इन्हे धार्मिक नेता तो नही कहा जा सकता लेकिन मुस्लिम समुदाय से आने वाले महबूबा मुफ्ती व फारुक अब्दुल्ला की पार्टियां जम्मू काशमीर तक सीमित है। यूपी मे धार्मिक नेताओं द्वारा ओलेमा कोंसिल व पीस पार्टी नामक राजनीतिक दल गठित कर रखे है। लेकिन वो भी अपना विस्तार अभी तक कोई खास नही कर पाये है।
भारत के मुस्लिम धार्मिक संगठनों मे जमीयत-ऊलेमा-ऐ-हिन्द मात्र ऐसा संगठन है जिनके बडी तादात मे भारत भर मे समर्थक मोजूद है। जो समर्थक भारत भर मे सीधे तौर पर ना सही लेकिन चुनावी माहोल बनाकर मतदान करने व करवाने मे मुस्लिम समुदाय मे बडी भूमिका अदा करते आ रहे है। अब तक जमीयत के अलग अलग दो धड़ो के नैता मोलाना अरशद मदनी व मौलाना महमूद मदनी अब तक साईड से राजनीतिक भूमिका अदा करते रहने के साथ मौके के अनुसार जुगाड़ करके कभी कभार राज्य सभा का चुनाव भी जीतने मे कामयाब रहे है। लेकिन पीछले हफ्ते बसपा व सपा के गठबंधन करने के बाद मोलाना अरशद मदनी की समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश कुमार से एक घंटे की मुलाकात ने सबको सोचने पर व उनके अगले कदम पर नजर रखने को मजबूर कर दिया है कि, क्या वो व उनकी जमीयत सीधे तौर पर यूपी मे समाजवादी पार्टी की हिमायत करेगी? दूसरी तरफ जमीयत के दूसरे धड़े के नेता मौलाना महमूद मदनी के अचानक जमीयत से त्याग पत्र देने के बाद सबकी नजरे उनके अगले कदम पर टिकी हुई है कि, क्या वो अलग से राजनीतिक दल बनाते है या फिर समाजवादी पार्टी मे शामिल होकर भारत भर मे महागठबंधन की हिमायत करने का ऐहलान करते है। यह सबकुछ उनके कुछ दिनो बाद होने वाली घोषणाओं के बाद ही पता लगेगा।
कुल मिलाकर यह है कि आसाम मे मोलाना बदरुद्दीन अजमल, हैदराबाद मे बेरीस्टर असदुद्दीन ओवैसी, केरल मे मुस्लिम लीग व कश्मीर मे महबूबा व फारुक अब्दुल्ला जैसे मुस्लिम नेताओं की कयादत वाली राजनीतिक पार्टियां सीधे तौर पर राजनीतिक मैदान मे रहकर जंग लड़ रही है। जबकि जमीयत के दोनो धड़ो के नेता मोलाना अरशद मदनी व मोलाना महमूद मदनी के अगले कदम का जनता को इंतेज़ार है।
