रतलाम। सहकार भारती मध्य प्रदेश के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि समाज जीवन में सहकारिता विद्यमान है। हमारे देश में सहकार की परम्परा काफी पुरानी है। अनादिकाल में दानव और मानव ने मिलकर समुंद्र मंथन किया था, इससे बढ़कर सहकारिता की भावना और कहा देखने को मिलती है। पुरानी परम्परा को ही आगे बढ़ाना है । सहकारी संस्थाओ को जिन लोगों ने राजनीति अखाड़ा तथा शोषण का माध्यम बना दिया है उसे हमें समाप्त करते हुए समाज के अंतिम पंक्ति को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए एक-जुट होकर काम करना होगा और अधिक से अधिक लोगों को सहकारिता से जोडऩा होगा।
सहकार भारती मालवा प्रांत की बडऩगर में आयोजित बैठक में श्री चतुर्वेदी ने यह कही। उन्होंने कहा कि यह वर्ष लक्ष्मणराव इनामदार की जन्म शताब्दी वर्ष है, जिन्होंने सहकार भारती की स्थापना की थी। प्रधानमंत्रीजी ने 21 सितंबर को उनकी स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में मिठी क्रांति (शहद उत्पादन) का संकल्प सहकार भारती के कार्यकर्ताओं को दिलवाया था और आव्हान किया था कि हरित क्रांति और श्वेत क्रांति के बाद देश के आर्थिक विकास के लिए मिठी क्रांति के महत्व को आगे बढ़ाएं। इसी संकल्प को शाजापुर में आयोजित प्रांतीय सम्मेलन में भी दोहराया गया तथा सम्पूर्ण प्रदेश में इसे लागू करने का संकल्प व्यक्त किया गया।
उन्होंने कहा कि मधुमक्खी ही केवल कीट प्रजाति का जीव है, जो मनुष्यों के लिए खाद्य पदार्थ (शहद ) उत्पादित कर मानव सेवा में लगी हुई है। मधुमक्खी पालन व्यवसाय ऐसी कृषि आधारित गतिविधि है जो आसानी से ग्रामीण परिवेश में शुरू की जा सकती है। इसके माध्यम से बेरोजगार युवक, कृषक, स्वयं का मधुमक्खी पालन व्यवसाय शुरू कर आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते है। सहकार भारती की ब्लाक स्तर तक की समितियां इस संकल्प को पूरा करने में मदद करे। उन्होंने सहकार भारती की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि शीघ्र ही संगठन को मजबूत बनाने की दृष्टि से जिला स्तर पर भी भ्रमण करेंगे।
प्रदेश संगठन प्रमुख संजय नायक ने कहा कि सही नेता वहीं है जो नए नेता का निर्माण करें। प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संस्कारित करने की आवश्यकता है तभी संगठन का विस्तार होगा।
प्रदेश महामंत्री उमाकांत दीक्षित ने कहा कि सहकारिता आंदोलन जनजागरण और सामाजिक परिवर्तन का पवित्र और उत्तम साधन बना रहे यही सहकार भारती का उद्देश्य है। बिना किसी राजनीतिक प्रलोभन के और बिना किसी शासकीय अपेक्षा के सहकार भारती देशभर में कार्य कर रही है। देश का आर्थिक उत्थान सहकारिता के माध्यम से हो यह हमारा लक्ष्य है। आज के दौर में सहकारिता आंदोलन में जो विसंगतियां आ गई है उसे दूर करना और भारत माता को परम वैभव तक ले जाना हमारा लक्ष्य है। जन सामान्य में सहकारिता के प्रति रूचि जागृत करना इमानदार और स्वच्छ नेतृत्व प्रदान करना और अधिक से अधिक लोगों को सहकारिता से जोडऩा इस दिशा में हम प्रयत्नशील है।
श्री दीक्षित ने कहा कि सारे प्रदेश में सहकार भारती संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए विभिन्न आयोजन कर रही है। इसी दृष्टि से मालवा प्रांत की यह बैठक आयोजित की गई, जिसमें अनेक निर्णय लिए गए है। इसी के साथ ही मध्य भारत तथा महाकौशल प्रांत की बैठकें आयोजित कर कार्यकर्ताओं को दायित्व प्रदान किए जा रहे है।
मालवा प्रांत के अध्यक्ष रामचंद्र गोयल ने प्रांत में चल रही गतिविधियों से अवगत कराते हुए कहा कि सहकार भारती को शासन महत्व दे इस दिशा में प्रयत्न किए जाना चाहिए। क्योकि सहकार भारती ही सही रुप में सहकारिता का प्रतिनिधित्व कर रही है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष माडगे एवं धर्मसिंह वर्मा ने भी इस अवसर पर संबोधित करते हुए देश के विकास में सहकारिता के महत्व को बताया और कहा कि सहकार भारती राष्ट्रीय स्तर पर 27 प्रदेश और 400 जिलो में फैली हुई है तथा लगभग 20 हजार से अधिक सहकारी समितियों को सहकार भारती के कार्यक्रमों और गतिविधियों से जोड़ा गया है। शोषण मुक्त समाज की स्थापना के लिए सहकारी आंदोलन को गति देना आवश्यक है। क्योंकि इसी के माध्यम से आम आदमी का विकास संभव है।
प्रारंभ में स्वागत भाषण सम्मेलन आयोजक भालचंद्र उपाध्याय ने सहकारी क्षेत्र में आ रही समस्याओं का जिक्र किया और कहा कि सहकारी संस्थाओं के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बारे में सहकार भारती चिंता करें तथा कार्यकर्ताओं को महत्व मिले इस दिशा में भी संगठन को विचार करना होगा। क्योंकि वर्तमान में शासन स्तर पर सहकारिता क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की काफी उपेक्षा हो रही है। यदि सहकारी आंदोलन को मजबूत बनाना है तो कार्यकर्ताओं के मनोबल को मजबूत बनाना होगा।
इस अवसर पर मालवा प्रांत के उपाध्यक्ष शरद जोशी, महामंत्री संजय श्रीवास,विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रकाश मेहरा, डेरी प्रकोष्ठ के प्रभारी देवेन्द्र शर्मा, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष डा. उषा भार्गव, झाबुआ जिलाध्यक्ष गणेश प्रजापत,बड़वानी अध्यक्ष राजेश सहित अन्य पदाधिकारी एवं मालवा प्रांत की जिला इकाईयों के अध्यक्ष एवं उज्जैन जिले के कार्यकर्ता उपस्थित थे। गीत की प्रस्तुति संगठन प्रमुख रमेश मालवीय तथा सरिता यादव ने दी। अतिथियों का शाल श्रीफल से अभिनंदन मालवा प्रांत उपाध्यक्ष गुमानसिंह राजपूत, तेजबहादुर सिंह शक्तावत, करणसिंह डोडिया, दशरथपुरी गोस्वामी, जयप्रकाश त्रिवेदी, कृष्णपालसिंह झाला, लक्ष्मीनारायण शर्मा, बसंत दोराया सहित पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। संचालन दशरथसिंह पंड्या ने किया व आभार उज्जैन जिले के अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने माना
