जबलपुर –शहर में बढ़ती पॉलीथिन की समस्या पर नगर निगम ने अपने स्तर पर पहल करते हुए पन्नी बीनने वाले करीब 200 लोगों को शनिवार को नगर निगम में आमंत्रित कर उनकी कार्यशाला की है। इस मौके पर नगर निगम ने पन्नी बीनने वालों को आॅफर दिया है कि यदि वे नगर निगम के लिए पन्नी बीनने का काम करें तो उन्हें कलेक्टर दर पर वेतन भी दिया जा सकता है। इस मौके पर नगर निगम ने शहर भर से पन्नी बीनने वालों को आमंत्रित किया था। कार्यशाला को अपर आयुक्त वित्त रोहित सिंह कौशल व स्वास्थ्य अधिकारी जीएस चंदेल सहित अन्य अधिकारियों ने संबोधित किया। इस अवसर पर पन्नी बीनने वालों से सुझाव भी लिए गए।
बड़ी समस्या बनी पन्नियां
पॉलीथिन पूरे शहर के लिए बड़ीसमस्या बनी है। हालाकि जबलपुर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगने के कारण इनका विनिष्टिकरण बिजली बनाने के लिए कर लिया जाता है,यही कारण है कि नगर निगम चाहता है कि पन्नी बीनने वाले उसके लिए काम करें। वर्तमान में होता यह है कि पन्नी बीननेवाले अल सुबह से कचरा बीनने वाली गाड़ी के पहले ही पन्नियां बीन लेते हैं और इन्हें बेच देते हैं। थोक वेस्ट पन्नियों का कारोबार करने वाले इन्हें एकत्र कर रीसाईकिलिंग प्लांटों को बेच देते हैं जहां पन्नियां दोबारा-तिबारा बन जाती हैं।
हरेक को मिलेंगे 350 रुपए प्रतिदिन
पन्नी बीनने वाले यदि नगर निगम का आॅफर मान लेते हैं तो उन्हें मासिक वेतन पर रखा जाएगा और कलेक्टर दर पर वेतन दिया जाएगा जो कि मासिक 10,500रुपए है। इस हिसाब से उन्हें प्रतिदिन 350 रुपए प्रतिदिन मिलेगा। वर्तमान में उन्हें अपनी मेहनत के हिसाब से पैसे मिलते हैं और इतनी राशि बहुत कम पन्नी बीनने वालों को ही मिल पाती है। यही कारण है कि पन्नीबीनने वाले इस आॅफर पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
ये होगा फायदा
यदि नगर निगम ने शहर भर के लगभग 300 पन्नी बीननेवालों को कलेक्टर दर पर काम दिया तो सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पन्नी रीसाईकिल करने वाले प्लान्टों को पन्नियां मिलनी बंद हो जाएंगी और और इनका बिजली बनाने वाले प्लांट में विनिष्टिकरण भी हो जाएगा। इस क्रम में शहर में स्वत: ही पन्नियां नजर आना कम हो सकता है।
