NITIN DUBEY ✍️ 9630130003
बड़े आश्चर्य की बात है कि नेता लोकतंत्र का गला घोट रहे हैं और देश का चौथा स्तंभ उसे चटकारे लगाकर सुना रहा है। न्यायपालिका भी आंख बंद करके देख रही है,और लग रहा है मानो जंगलराज है। कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद राज्यपाल ने सरकार को बहुमत साबित करने के लिए निर्देशित किया है।अब सवाल यही उठता है कि राज्यपाल ने जब सरकार को अल्पमत में मान लिया है, तो विधानसभा में अभिभाषण राज्यपाल किसके लिए पढ़ेंगे? क्योंकि जब राज्यपाल ने मान लिया है कि सरकार अल्पमत में है, तो वह सदन में किस तरह अभिभाषण में अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाएंगे? विधानसभा की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण भी होना है। विधानसभा अध्यक्ष अलग निर्णय लेकर उसे विशेषाधिकार बता रहे हैं। जब राज्यपाल ही सरकार को अल्पमत में मान रहे हैं, तो फिर विस अध्यक्ष की क्या भूमिका? ऐसे हालात में राज्यपाल राष्ट्रपति शासन लागू भी कर सकते हैं।
इसलिए यह नेताओं के द्वारा पैदा किया हुआ संवैधानिक संकट है।
दूसरी बात लोकतंत्र की हत्या। आम जनता और गरीब जनता ने इन विधायकों को अपना अमूल्य मत इसलिए दिया था कि यह हमें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे, हमें न्याय दिलाएंगे, हमारा जीवन स्तर ऊपर उठाएंगे, लेकिन यह सवाल तो अपनी जगह है यह माननीय विधायक अपने आप को मंत्री और मुख्यमंत्री बनवाने के लिए जनता के अमूल्य वोट का बलिदान कर चुके हैं ।आज जिस तरह मध्य प्रदेश की राजनीति में हो रहा है उसे लोकतंत्र की हत्या ही कहा जाएगा। मेरे हिसाब से यह उस गरीब जनता के साथ धोखा है जिसने इन्हें चुना।
अगर इन नेताओं को अपनी सुविधा अनुसार दल बदलने की सुविधा है तो जनता को भी तत्काल अपना वोट इनसे वापस लेने की सुविधा होनी चाहिए? क्योंकि यह लोग जनता के द्वारा ही भेजे गए हैं यह अपनी मनमर्जी नहीं कर सकते हैं।
यहां हास्यास्पद बात यह भी है कि बेंगलुरु में विधायक अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं उनका कहना है कि उनको केंद्रीय सुरक्षा मुहैया कराई जाए। सवाल यह खड़ा होता है कि इन बाहुबलियों के क्षेत्र में परिंदा भी इनकी मर्जी के बगैर नहीं उड़ सकता तो इन्हें बंधक कौन बना सकता है ? कुल मिलाकर जनमत का मजाक उड़ाया जा रहा है।
