भोपाल । उत्तरप्रदेश में पत्रकारिता पर लगातार हो रहे हमलो ओर पत्रकारों की हत्या ने यह साबित कर दिया है कि योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार में क़ानून व्यवस्था नाम की चीज़ ख़त्म हो गई है । कहीं बदमाश के हाथों पुलिस वाले मारे जा रहे हैं तो कहीं कलम के सिपाहियों की बदमाशों द्वारा निर्शन्स हत्याएं हो रही हैं । यूपी के बलिया में टीवी पत्रकार रतन सिंह की गोली मार कर हत्या के बाद उत्तर प्रदेश में पिछले एक महीने में पत्रकार की यह दूसरी हत्या है। इससे पहले गाजियाबाद में 20 जुलाई की रात पत्रकार विक्रम जोशी को कुछ बदमाशों ने सिर में गोली मार हत्या कर दी थी जब वह अपनी दो बेटियों के साथ घर लौट रहे थे। तभी उन पर कुछ लोगों ने घेर कर हमला कर दिया था।
प्राप्त जानकारी अनुसार फेफना गांव में 24 अगस्त की रात पत्रकार रतन सिंह को लाठी-डंडों से पीटा गया और गोली मारी गई.। ‘इंडिया टुडे’ के अनिल अकेला की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त की रात रतन सिंह अपने घर लौट रहे थे. तभी कुछ लोगों ने उनका पीछा किया. उन्होंने जान बचाने के लिए गांव के प्रधान के घर जाकर छिपने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उन्हें दौड़ाकर गोली मार कर हत्या कर दी ।
उत्तरप्रदेश में गुंडाराज क़ायम हो सा गया है जहाँ खून खराबा अब आम बात हो गई है ऐसे में कलम के सिपाही पत्रकारों की हत्याओं ने योगी सरकार के पत्रकार विरोधी होने का प्रमाण दिया है । योगी सरकार के आने से पूर्व भी पत्रकार बिरादरी उत्तरप्रदेश में सुरक्षित नही थी परन्तु अब सुरक्षा की कोई गारंटी नज़र नही आती । योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिये कोरी घोषणाओं के बावजूद अब तक पत्रकार सुरक्षा क़ानून लागू नही होना पत्रकार जगत के लिये गहरा आघात है ।
सम्पूर्ण भारत में विभिन्न पत्रकार संगठनों की मांगो के बावजूद भारत वर्ष में ना तो केंद्र सरकार ने ओर न ही प्रदेश सरकारो ने पत्रकार सुरक्षा क़ानून बनाया है । यह चिंता का विषय है कि अपनी जान हथेली पर लेकर पत्रकारिता करने वाला पत्रकार समाज आज़ादी के 73साल बाद भी अपने आपको असहाय , असुरक्षित मेहसूस कर रहा है ।
यूपी के बलिया में टीवी पत्रकार रतन सिंह की हत्या की तीखी निंदा के साथ दिवंगत पत्रकार को श्रद्धांजलि ।
@सैयद ख़ालिद कैस -अध्यक्ष प्रेस कौंसिल ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट# 8770806210
