सैयद ख़ालिद कैस के साथ पप्पू मंसूर ओर शमीम अंसारी की रिपोर्ट ।
भोपाल। एक और संपूर्ण भारत कोरोनावायरस जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए भरसक प्रयास कर रहा है । प्रधानमंत्री के आह्वान पर संपूर्ण भारत में 21 दिन का लोक डाउन किया गया है तथा संक्रमित व्यक्तियों की पहचान करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।
विदेशों व अन्य प्रदेशों से आए हुए लोगों तथा मजदूरों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं । वहीं दूसरी ओर इस गंभीर बीमारी की रोकथाम के अभियान को प्रश्न चिन्ह लगाने की एक खबर राजधानी भोपाल से आ रही है, जहां पुलिस तथा प्रशासन की गंभीर अनियमितता के कारण कोरोनावायरस जैसी गंभीर बीमारी के संक्रमण का खतरा और व्यापक रूप धारण करने का संदेह उत्पन्न हो गया है ।
मालूम हो कि प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश गुजरात से छतरपुर के 27 मजदूर परिवार 22 मार्च से लगातार पैदल चलकर आज रात राजधानी भोपाल के गांधी नगर क्षेत्र में आकर रुके । जहां कुछ घंटे के विश्राम के बाद राजधानी पुलिस -जिला प्रशासन के अनियमित आचरण का खुला प्रमाण सामने आया । गांधीनगर पुलिस व जिला प्रशासन द्वारा इन 27 मजदूर परिवारों को जो कि गुजरात से पैदल चलकर राजधानी भोपाल पहुंचे थे बिना किसी स्वास्थ्य परीक्षण के प्राइवेट वाहन द्वारा मजदूरों को उनके गृह जिले छतरपुर रवाना कर दिया गया ।
यहां एक गंभीर मुद्दा सामने आता है कि जब देश में हर घंटे संक्रमित व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, कोरोनावायरस के प्रति जन जागरण व्यापक स्तर पर हो रहा है । ऐसे में राजधानी भोपाल की गांधीनगर पुलिस द्वारा इन 27 लोगों को बिना किसी परीक्षण के राजधानी भोपाल से छतरपुर रवाना करना कहीं वायरस के संक्रमण को व्यापकता प्रदान ना कर दे ।
गौरतलब बात यह भी है कि गुजरात से पैदल चलकर हज़ारो किलोमीटर दूर का रास्ता तय करने वाले गरीब मजदूरों को गुजरात से लेकर भोपाल तक किसी भी प्रकार की सहायता शासन द्वारा मुहैया नहीं कराई गई।
हमारे प्रतिनिधि द्वारा मजदूरों से चर्चा करने पर यह जानकारी प्राप्त हुई दिनांक 22 मार्च को पैदल चले यह 27 मजदूर लगातार पैदल यात्रा करते हुए आज राजधानी भोपाल के गांधीनगर में आकर ठहरे । बातचीत में मजदूरों ने बताया गुजरात बॉर्डर पर केवल उनका चेकअप करा गया । ना तो उनको किसी प्रकार की राहत राशि या खादय सामग्री उपलब्ध कराई गई, न किसी प्रकार का उनका परीक्षण किया गया।
