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भोपाल – मुख्यमंत्री कमलनाथ के शपथग्रहण समारोह में भिंड का पूर्व डाकू बाली बाबा संत का वेष धरकर मंच पर बैठाया गया था।
चित्र के लाल घेरे में कंप्यूटर बाबा के बगल में मंच पर पीली पगड़ी धारण करने वाला कोई संत नहीं बल्कि बाली बाबा है।जिस पर सत्तर- अस्सी के दशक में अपराध के कई मामले पंजीबद्ध थे।
अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि कमलनाथ का मीडिया मैंनेजमेंट क्या कर रहा था ?
मंच पर किसे बैठाना है और किसे नहीं…. इसकी पूरी जानकारी मीडिया मैंनेजमेंट के पास होती है।
गौरतलब है कि बाली बाबा का नाम वर्ष 1978 में भिंड की एक डकैती में बहुत तेजी से उछला था।
उस दौरान बाली बाबा अपना नाम बदलकर पुलिस को चकमा देकर ग्वालियर भाग आया।
लेकिन पुलिस के पास कोई ठोस सुराग न होने के चलते बाली बाली बाबा साधु का वेष धारण करके जरायम की दुनिया से जुड़ा रहा।
इस दौरान बाली बाबा अपना नाम रतिराम बाबा रख लिया।
ग्वालियर से जुड़े लोगों का कहना है कि ग्वालियर में एक रामरसिया ट्रस्ट में एक सिद्ध हनुमान जी की मूर्ति थी, इस ट्रस्ट को एक महिला चलाती था। यह बाबा इस मंदिर पर कब्जा जमाने की जुगात में पड़ गया, लेकिन ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों की नजर बाबा की खोटी नियत को समझ गई और बाबा की शिकायत पुलिस से कर दी गई।
बाली बाबा अपने को चैतरफा घिरता देखकर वहां से दुबारा फरार हो गया।
अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि एक ऐसा अपराधी जिसका अपराध की दुनिया से गहरे ताल्लुकात है तो वह कमलनाथ के शपथ समारोह मेे मंच तक कैसे पहुंचा ?
सूत्रों का कहना है कि मंच पर पहुंचाने में उसकी मदद करने वाला कोई और नहीं कंप्यूटर बाबा है। ये वही कम्प्यूटर बाबा है जो कभी भाजपाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की आँखों तारा हुआ करता था, जिसने कमलनाथ को इस अपराधी से मिलवाया था सर जी।
(कम्प्यूटर बाबा के रिकॉर्ड-खुलासे के लिए बस थोड़े समय तक इन्तजार कीजिए) ओमप्रकाश चौकसे वरिष्ठ एवं खोजी पत्रकार हैँ उनकी खोजबीन पर आधारित समाचार
