भोपाल -लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार चाहती थी कि विवेक ओबेराय अभिनीत फ़िल्म “पीएम नरेंद्र मोदी “को चुनाव से पूर्व रिलीज़ करवा दें । फ़िल्म की रिलीज़ को रुकवाने सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाओं का दौर चला । सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुऐ गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी । जबकि चुनाव आयोग पूर्व में ही फ़िल्म को क्लीन चिट देकर सेंसर बोर्ड पर मामला थोप दिया था । इस दरमियान चुनाव आयोग की मोदी और सरकार की और झुकाव के आरोप लगे , जमकर हंगामा हुआ । मोदी एंड कम्पनी ने “नमो टीवी “के प्रसारण में सफलता पाई । लेकिन लगातार आलोचनाओं को झेल रहे चुनाव आयोग को जोश आया तो सबसे पहले उसने नमो टीवी के प्रसारण को आचार संहिता के दायरे में लाकर भाजपा पर खर्चा थोपा अब एक और महत्वपूर्ण क़दम उठाते हुऐ अंततः फ़िल्म पीएम नरेंद्र मोदी की रिलीज़ पर रोक लगा ही दी । चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की रिलीज पर रोक लगा दी है। फिल्म 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी। बायोपिक को रिलीज करने या न करने का फैसला उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग पर छोड़ दिया था। विपक्ष लगातार फिल्म पर रोक लगाने की मांग कर रहा था क्योंकि उसका कहना है इससे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होता है। फिल्म की रिलीज से एक पार्टी या व्यक्ति विशेष के प्रति मतदाता प्रभावित होंगे। फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का फैसला ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही सेंसर बोर्ड से इसे यू सर्टिफिकेट मिला है। मंगलवार को फिल्म को यू सर्टिफिकेट मिला था और अब यह सुनिश्चित करना निर्माताओं के हाथ में था कि वह उसे पूर्व निर्धारित तारीख पर रिलीज करते हैं या नहीं।लोकसभा चुनाव के मद्देनजर में पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लागू है ऐसे में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में कांग्रेस कार्यकर्ता ने याचिका दाखिल की थी। जिसपर मंगलवार को सुनवाई करते हुए न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया था।उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वह फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा है क्योंकि याचिका ‘अपरिपक्व’ है। फिल्म को अभी सेंसर बोर्ड ने भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है।न्यायालय ने कहा था कि अगर फिल्म 11 अप्रैल को रिलीज होती है जैसा कि कांग्रेस कार्यकर्ता ने दावा किया है तो भी यह उचित होगा कि वह निर्वाचन आयोग के पास जाए। यह फैसला चुनाव आयोग को करना है कि क्या फिल्म आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करती है या नहीं।
@khalidqais786
