हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा!!
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हिन्दी भाषा की विशेषताओं का क्या बखान करूँ, जिसने ख़ुद यह सिखाया कि “विशेषण” किसे कहते हैं?हिन्दी भाषा की महानता का क्या गुणगान करूँ?
जो ख़ुद अपने अंदर हर भारतीय की पहचान, सभ्यता व संस्कृति समेटे है।
मेरे विचार से हिन्दी के प्रचार-प्रसार का एक बेहद सरल उपाय यह हो सकता है कि जिस स्थान, सभा, समाज या कहीं भी, अगर ये भान हो कि अधिकतर लोग हिन्दी समझ सकते हैं, वहां अंग्रेजी में बात करके अपनी आधुनिकता का परिचय न दें, क्योंकि आधुनिकता अंग्रेजी की जानकारी पर निर्भर नहीं करती। ऐसा करके हम अनजाने में अपनी राष्ट्र भाषा का अपमान करते हैं, और यही बढ़ता प्रचलन हिन्दी की गरिमा को धूमिल करती जा रही है।
इसी परिपेक्ष्य में दूसरा पहलू यह भी है कि आज के दौर में जहाँ अधिकतर मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, और पढ़ाई−लिखाई से लेकर रोजगार व कारोबार के क्षेत्र में अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिये अंग्रेजी में भी कच्चा होना ठीक नहीं। वैसे भी जिसे एक से अधिक भाषाओं में महारत हासिल हो, वह ज्ञानी होने के साथ-साथ वैश्विक होते इस विश्व में कहीं भी अपनी नेटवर्किंग का विस्तार करने की क़ाबिलियत रखता है। परंतु इन सबके बीच यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि
“हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा”
इसलिए अपनी क्षेत्रीय भाषा के बाद पहली प्राथमिकता हिन्दी सीखने को देनी चाहिए जो की विश्व की तीसरी सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है उसके बाद दूसरी भाषाओं को सीखने की चेष्टा करनी चाहिए।
हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई।
जय हिन्द-जय भारत 🙏🇮🇳🙏
शशि दीप ©✍
मुंबई

