इंदौर के खजराना में इन दिनों एक नई बहस छिड़ी हुई है… विषय है इंदौर में बहुचर्चित सड़क MR-9 का निर्माण…लगभग 11 km लम्बी इस ज़रूरी सड़क का 8 km का हिस्सा बन चुका है और सिर्फ 3km का वो हिस्सा बचा है जिसे खजराना इलाके से होकर बायपास पर जुड़ना है…जिस जगह से सड़क निर्माण होना है वहां ज़्यादातर अवैध बस्तियां बसी हुई हैं,मकान बने हैं जिन्हें सड़क निर्माण के लिए हटाना होगा…और यही बहस का विषय है..इस सारे मामले को लेकर इलाके के दोनों पार्षदों सहित कुछ लोगों का तर्क है कि MR-9 के निर्माण से सैकड़ों “गरीबों” के मकान टूटेंगे और खजराना को इस सड़क की ज़रूरत ही नहीं है लिहाज़ा यहां इस सड़क का निर्माण ही न किया जाए और अगर करना ज़रूरी है तो जितनी जगह उपलब्ध है उतनी ही सड़क बना दी जाए…MR-9 निर्माण विरोधी खेमे के यह भी तर्क है कि सड़क निर्माण में प्रभावित हो रहे मकानों के सरकार कोई मुआवज़ा नहीं दे रही है बल्कि सड़क के आधा आधा km हिस्से में आ रहे मकानों से सरकार बेटरमेंट चार्ज वसूलने की बात कर रही है…एक पत्रकार होने के साथ साथ खजराना का बाशिंदा होने के नाते मैं भी इस बहस में शामिल हूँ लेकिन मेरा मानना है कि MR-9 जैसी सड़को के निर्माण का इलाके में खुली बाहों से स्वागत किया जाना चाहिए..इसे निर्धारित चौड़ाई के साथ खजराना से गुजरने दिया जाना चाहिए…जिस तरह सड़क निर्माण विरोधी खेमे के अपने तर्क हैं उसी तरह निर्माण के पक्ष में होने के मेरे अपने तर्क हैं जिसे मैं सड़क निर्माण विरोधी खेमे,इंदौर वासियों और खास तौर पर खजराना वासियों के सामने रखना चाहता हूं।
1.मेरा मानना है कि “खजराना को इस सड़क की ज़रूरत ही नहीं है” जैसा तर्क निहायत बचकाना तर्क है कियूंकि कोई भी सड़क सिर्फ गुज़रने वाले इलाके की ज़रूरत के हिसाब से नहीं बनाई जाती कल को तो बड़े बड़े हाई-वे और मेट्रो ट्रेन या बुलेट ट्रेन मार्ग निर्माण में प्रभावित होने वाले ग्रामीण इलाके के लोग बोल दें कि हमारे गांव को हाई-वे या बुलेट ट्रेन की ज़रूरत नहीं है तो क्या निर्माण रोक दिया जाएगा ? MR-9 खजराना की नहीं इंदौर की ज़रूरत है जिससे शहर का ट्रैफिक बायपास से जुड़ेगा इसलिए ये मायने नहीं रखता कि खजराना को इस सड़क की ज़रूरत है या नहीं..लिहाज़ा MR-9 का अपनी निर्धारित चौड़ाई के साथ ही निर्माण किया जाना चाहिए।
2. विरोधी खेमे के दूसरा तर्क की “इससे सेकड़ो गरीबों के मकान टूटेंगे”..इस मामले में अगर मानवता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मुझे भी इस बात का दुख है और शासन से इन प्रभावितों को कोई मुआवज़ा दिलाने की लड़ाई में मैं उनके साथ हूँ…लेकिन एक पत्रकार के नाते मेरा सवाल है कि MR-9 की यौजना कोई साल दो साल में नहीं बनी है…सबसे बड़े गुनाहगार तो वो भ्रष्ट कॉलोनाइजर हैं जिन्होंने बरसों पुरानी प्रस्तावित इस सड़क के निर्माण वाली जगह पर अवैध कॉलोनियां काट कर गरीबों को ठगा…और ये सिलसिला आज भी जारी है..खजराना से निकलने वाली एक और प्रस्तावित मुख्य सड़क आर.आई.-2 की जगह पर भी अवैध कॉलोनियाँ काट कर धड़ल्ले से मकान निर्माण किये जा रहे हैं..कल को जब आर.आई.-2 के निर्माण के लिए इन्हें हटाने की बारी आएगी तो फिर गरीबों के नुकसान का रोना रोया जाएगा।
3.विरोधी खेमे के यह भी तर्क है कि “लोगों ने अज्ञानता वश गलत प्लॉट खरीद लिए और उन्हें सड़क निकलने की जानकारी नहीं थी” मेरा मानना है हो सकता है उनका यह तर्क आंशिक रूप से सही हो…लेकिन देखने मे आ रहा है कि प्रभावितों में क्षेत्र के दोनों पार्षदों के मकान/मल्टी प्रभावित हो रही है…चलो ये मान लिया जाए कि आम आदमी को सड़क की जानकारी नहीं थी तो क्या क्षेत्रीय पार्षद जो खुद ज़मीन के कारोबार से जुड़े हैं..क्या उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं थी ?? आखिर सब कुछ जानते बुझते उन्होंने सड़क से प्रभावित जगह में मल्टी का निर्माण कियूं किया ?? और अब अपने मकान/मल्टी बचाने के लिए जनता के हित की आड़ ले रहे हैं।
4.विरोधी खेमा बेटरमेंट चार्ज और मुआवज़े की बात करता है इस मामले में मेरा मानना है कि सड़क निर्माण के लिए खजराना में होने वाली तोड़-फोड़ कोई नई बात तो नहीं है..उन्नति/विकास तोड़-फोड़ के साथ ही आते हैं..जब तक पुराना टूटेगा/हटेगा नहीं तब तक नया कैसे बनेगा ? और क्या बम्बई-बाजार, मल्हारगंज,लोहार पट्टी,बड़ा गणपति,बियाबानी,तिलकनगर सहित अनेक इलाकों में भी तो सड़क निर्माण के लिए तोड़-फोड़ की गई है..तो फिर खजराना की तोड़-फोड़ को भेद-भाव पूर्ण बताना मूर्खता से ज़्यादा कुछ नहीं है..रहा सवाल बेटरमेंट चार्ज का तो मुझे याद पड़ता है कि खजराने के पास से निकले रोड़ MR-10 पर सड़क निकलने से पहले जो ज़मीन 1500/-sq.फिट थी आज सड़क निकलने के बाद वही ज़मीन 10,000/-sq. फिट तक पहुंच चुकी है..ज़ाहिर सी बात है MR-9 बनने के बाद खजराना की प्रॉपर्टी की कीमतों में भी उछाल आएगा..कारोबार बढेगा..सड़क किनारे व्यवसायिक गतिविधियों से इलाके को लाभ मिलेगा ऐसे में यदि शासन को आंशिक बेटरमेंट चार्ज चुकाया भी जाये तो क्या हर्ज है ? रहा सवाल प्रभावितों के मुआवज़े का तो इस मामले में सरकार से बात की जा सकती है ।
ये तो विरोधी खेमे के घोषित तर्क…आप ज़रा सड़क विरोधी खेमे के उन सदस्यों के तर्क पर पर भी बात कर ली जाए जो इस सारे मामले को मज़हबी चश्मे से देख रहे हैं उनको इस सड़क निर्माण में मुस्लिमों का माली नुकसान नज़र आता है तो मेरा मानना है वो इस मामले में क़ोम के नाम पर जज़्बाती होने से पहले इस्लाम का अध्ययन करें..उनका मज़हब तो रास्ते में पड़े पत्थर को हटाना भी सवाब(पुण्य) बताता है..इस्लाम कहता है कि जिसने एक इंच जगह पर अतिक्रमण/अवैध कब्जा किया वो ज़मीन क़यामत के दिन तौक़ (एक तरह की माला) बना कर अतिक्रमणकारी के गले मे डाल दी जाएगी..उसके बरअक्स ये मुस्लिम क़ोम क्या कर रही है…आज सबसे ज़्यादा अतिक्रमण प्रभावित इलाके मुस्लिम ही होते हैं..खजराना भी उससे अछूता नहीं है…लगभग 100 फिट चोड़ा खजराना मेन रोड अतिक्रमण के चलते 20 फिट की संकरी गली में तब्दील हो गया है…बड़े मदरसे के पास वाला रोशन नगर का रोड़ भी 100 फिट से ज़्यादा चौड़ाई का है लेकिन आज इस पर पर भी 40-40 फिट अतिक्रमण कर मकान दुकान शेड बना दिये गए हैं…कल जब सड़क चौड़ी होगी तो यही भ्रष्ट बेईमान अतिक्रमण कारी गरीब मुसलमान के नुकसान का रोना रोयेंगे और वोट बैंक के लालची नुमाइंदे इन बेईमान ज़मीन-चोरों की हिफाज़त में खड़े नजर आएंगे…सवाल सिर्फ मेन रोड का ही नहीं है..कॉलोनियाँ भी मुफ्त की ज़मीन पर कब्ज़े की बेईमान मानसिकता से महफूज़ नहीं हैं..अल्लाह नबी का दम भरने वाले पाखंडियों ने अपनी मोहल्ला छाप संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए अपने निर्धारित प्लॉट से 5-7 फिट बाहर तक निर्माण किये हैं फिर 5-7 फिट रेम्प या पेड़ लगाने के नाम पर कब्ज़ा जमाया और फिर 3-4 फिट का ओटला बना कर उसके आगे अपनी गाड़ियां पार्क कर दी हैं नतीजतन 30-40 फिट कॉलोनी की सड़क 8-10 फिट की गली बन कर रह गयी है…मेरा स्पष्ट मानना है कि ऐसे मक्कार बेईमानों के नुकसान का हौव्वा खड़ा कर खजराना तो क्या किसी भी इलाके में सड़क या किसी भी निर्माण का विरोध नहीं किया जाना चाहिए…लिहाज़ा मैं MR-9 जैसी सड़कों का उनकी निर्धारित चौड़ाई के साथ पूर्ण समर्थन करता हूँ…और बाकी तरक्की पसन्द लोगों से भी अपील करता हूँ कि वो इसका विरोध छोड़ कर खुली बाहों से इसका समर्थन करें..।
(परवेज़ इक़बाल की क़लम से )
