भोपाल –देश की लोक सभा में तीन तलाक़ को क़ाबिल ऐ सज़ा जुर्म क़रार देने से मुताल्लिक़ बिल पास होने के बाद राज्य सभा में उसका क्या हश्र होगा अभी कहना मुश्किल है पर बिल पास होने के बाद bjp में जिस तरह का सेलिब्रेशन है और मिडिया विशेषतः इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और कुछ या कई महिलाएं जिस तरह बगलें बजा रहा उसके अर्थ जानकार अच्छे से समझ रहे हैं ।

मीडिया और बीजेपी के पास इसका कोई जवाब नही न तलाश करना चाहता कि तीन तलाक़ पर बेन या पाबन्दी से मुस्लिम महिलाओं और आम मुसलमानो के सुलगते मसाइल क्या हल हो जाएंगे। जवाब है इस से मीडिया और सरकार या बीजेपी को कोई सरोकार भी नही।
बहरहाल इस्लाम में निकाह य शादी की एहमियत या फ़ज़ीलत है जबकि जाइज़ चीजों में अल्लाह को सब से ज़ियादा ना पसन्द _ तलाक़– है लेकिन इस का एहतेमाम रखने की कई वजूहात में से एक यह भी हे कि निबाह न होने पर इज़्ज़त से औरत से छुटकारा पा लिया जाए और किसी तरह का ऐसा ज़ुल्म कि मर्द औरत का क़त्ल न करदे जैसा कि दीगर क़ोमों में देखने को मिलता है कि लोग पीछा छुड़ाने के लिए बीवी को आग के हवाले भी कर देते हैं ।
तीन तलाक़ पाबन्दी बिल को लेकर भले ही औरतों और मीडिया के एक हल्के में बगलें बजाई जा रही हों पर मध्य प्रदेश की राजधानी के मुस्लिमों में इसे लेकर कोई खास चर्चा नही है बल्कि इन दिनों आम मुसलमानों के घरों में शादियों की बहार है और मस्जिदें निकाह की महफ़िलों से गुलज़ार हैं ।
जुमा 29 दिसम्बर को भी राजधानी भोपाल की अज़ीमुश्शान ताजुल मसाजिद में लगभग एक दर्जन निकाह हुए जिनमें दो परिवारों के लोगों के साथ सेकड़ों दोस्त अहबाब शरीक रहे। बदलते माहोल और चमक दमक वाली ज़िन्दगी में ज़रूरत इस बात की है कि नोब्याहता जोड़े और नए रिश्तेदार नई रिश्तेदारी में किसी भी किस्म की छोटी मोटी खटास आने पर ख़ुलूस और मोहब्बत से दूर करते हुए रिश्तों को मज़बूत बनाने की हर मुमकिन कोशिश करें और टूटने की नोबत न आने दें क्योंकि रिश्ता तोड़ना अल्लाह को नापसन्द है।
(साभार )मुशाहिद सईद खान
भोपाल । सम्पर्क9977990585
