भोपाल –आज राजधानी के समस्त समाचार पत्रों में यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया कि मप्र की शिवराज सरकार का महिला -बाल विकास विभाग एक ड्राफ्ट पेश कर चुका है कि प्रदेश की दुराचार पीड़ितो को सरकार शस्त्र लाइसेंस देगी ,पढकर इनकी समझदारी पर अफ़सोस हुआ ,कभी यह सरकार उन पीड़ितों को पद्मावती सम्मान देने की बात करती है , तो कभी हथियार ?
मप्र को ब्लात्कार प्रदेश कहने में कोई अतिशियोक्ति नही होगी ,कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब समाचार पत्रों में बलात्कार की खबरों को स्थान ना मिलता हो , दुर्भाग्य पूर्ण तो यह है कि समाचार पत्र ,पत्रिकाओं सहित खबरिया न्यूज़ चेनल चटखारों के साथ इन ख़बरों को प्रकाशित ,प्रसारित करते हैं ,उस पीडिता के अंतर्मन से पूछो जिस पर यह गुजरी .
खैर ? सरकार को अपराध मुक्त व्यवस्था की चिंता करनी चाहिए ,परन्तु सरकार अपने निकम्मेपन को छिपाने के लिए नित नई नई घोषणाओ से अपने दायित्वों का निर्वहन कर इतिश्री कर लेती है .हथियार का लाइसेंस लेकर क्या कोई पीडिता अपनी लुटी अस्मिता को वापस पा सकती है ,क्या पद्मावती सम्मान से समाज में उसका मान सम्मान बढ़ जाएगा ,क्या इस तरह अपराध पर रोक लगेगी ,क्या इससे अपराध मुक्त प्रदेश के पाखण्ड का कलंक शिवराज सरकार के माथे से मिट जाएगा .बिलकुल भी नहीं .फिर इसकी क्या ज़रूरत .अपने काले मुंह को बचाने का एक माध्यम केवल उपहास ही साबित होगा .
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश बलात्कार के मामले में नम्बर 1 है जहाँ 2016 में 4882 बलात्कार की घटनाएं हुई जो इसके पूर्व के वर्षों से 12.5 प्रतिशत अधिक है महिलाओं की मानव तस्करी में भी मध्यप्रदेश ना केवल अवल्ल है बल्कि प्रदेश में 19290 महिलाये ऐसी है जिनका आज तक कोई पता नही चला ।

मेरा मानना है कि सरकार को अपराध मुक्त ,भय मुक्त समाज की स्ठापना पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए ना कि पीडिता को सम्मान या हथियार देने की घोषणा . सामाजिक तिरस्कार झेल रही पीडिता को ना तो किसी सम्मन्न की आवश्यकता है और ना हथियार की . आवश्यकता है अपराध मुक्त समाज की . सरकार को समाज में फेल रहे अपराध को रोकने पर जोर देना चाहिए ना की अपराध ग्रस्त को सम्मान या हथियार देने की बात .
*सैयद खालिद कैस
