भोपाल -प्रदेश की भाजपा सरकार के मुखिया हर मोर्चे और विफल नजर आते है । प्रदेश मे सिर्फ बेटियाँ ही असुरक्षित नही वरन लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रक्षक सिपाही पत्रकार भी असुरक्षित हैं । भूमाफिया , रेत माफिया , गुंडे बदमाशों से सीधी टक्कर लेने वाले क्रांतिकारी पत्रकार पुलिस -प्रशासन के भी निशाने पर हमेशा रहते हैं । ताजा मामला प्रदेश के भिंड ज़िले का है जहाँ रेत माफिया और पुलिस की मिलीभगत को उजागर करने वाले पत्रकार को सच्चाई दिखाने के बदले अपनी जान की आहूति देनी पड़ी । ख़ास बात तो यह है की दिवंगत पत्रकार द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूर्व मे ही अवगत करा दिया था कि उसकी जान को खतरा है , परन्तु निकम्मे तंत्र ने उस और ध्यान ही नही दिया और पत्रकार जान की आहूति दे गया । निकम्मी पुलिस ने हत्या को दुर्घटना बनाकर हत्या का मुकदमा दर्ज नही किया यह भी षडयंत्र से कम नही ।
यह पहला मामला नही है इससे पूर्व 02 जून 2017 नईदुनिया मंदसौर के जुझारू पत्रकार कमलेश की हत्या.।
22 जून 2015 बालाघाट के कटंगी के पत्रकार संदीप कोठारी की हत्या कर शव जलाया दिया गया।
27 मार्च 2018 को भिंड के एक ओर युवा पत्रकार संदीप शर्मा ने जान देकर क़लम को नही बिकने का सुबूत दिया..।
शिवराज सरकार की कुम्भकरणी नींद कब टूटेगी । कब तक पत्रकारोँ की बलि लेती रहेगी सरकार । पत्रकार सुरक्षा कानून के अभाव मे यूँही पत्रकार बिरादरी कब तक अपने प्राणों की आहुति देती रहेगी ।
अफसोस ………
#अगर तुम आसमाँ पर जा रहे हो शौक़ से जाओ ,
मिरे नक़्श-ए-क़दम आगे की मंज़िल का पता देंगे……
* सेय्यद खालिद कैस
