भोपाल । मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार उपेक्षित व्यवहार के शिकार पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपने सोशल मीडिया एकाउंट से कॉंग्रेस के तमाम पदों को हटाकर कॉंग्रेस से दूरी के संकेत शुभ नही हैँ । निःसन्देह सिंधिया का मध्यप्रदेश के राजनीति और युवाओं में पकड़ से इंकार नही किया जा सकता है । उनका महत्व किसी भी मायने में अन्य कॉंग्रेस नेताओं से कम नही आंका जा सकता । वह राष्ट्रीय स्तर ने नेता थे हैँ और रहेँगे । परन्तु मध्यप्रदेश की राजनीति के कुछ मठाधीश ज्योतिरादित्य सिन्धिया के प्रति जो कूटनीति अपना रहे हैँ वह कॉंग्रेस के लिऐ शुभ संकेत नही देती ।
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉंग्रेस की शानदार जीत के बाद मुख्यमन्त्री का ताज कमलनाथ के सिर से पहले ज्योतिरादित्य सिन्धिया की दावेदारी को नकारा नही जा सकता था । प्रदेश को युवा तरुणाई के रूप में सिंधिया को मुख्यमन्त्री की कमान मिलने पर प्रदेश के युवाओं में हर्ष था , पर पार्टी हाईकमान ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री चुना , उसके बाद भी लोकसभा चुनाव में गुना सीट गवाने के बाद यदि सिंधिया को मध्यप्रदेश कॉंग्रेस की कमान मिलती तो कॉंग्रेस को लाभ ही होता , परन्तु लगातार रणनीति के तहत मध्यप्रदेश में कॉंग्रेस की कमलनाथ सरकार आने के एक वर्ष की अवधि गुजरने के बावजूद मध्यप्रदेश कॉंग्रेस अध्यक्ष पद का निर्धारण नही होना और बार बार सिन्धिया को छलना कॉंग्रेस के लिऐ ठीक नही ।
आज सुबह से ही सोशल मीडिया पर ज्योतिरादित्य सिन्धिया की नाराज़गी की पोस्ट वायरल होने के गंभीर परिणाम आने की आहत है । बहरहाल ज्योतिरादित्य सिन्धिया के प्रति बरते जा रहे व्यवहार से कॉंग्रेस को निःसन्देह आघात पहुंचेगा ।
@बकलम -सैयद ख़ालिद कैस
