आज मुख्यमन्त्री कमलनाथ के नेतृत्व की सरकार का मध्यप्रदेश में बने एक साल हुआ । पूर्व मुख्यमन्त्री दिग्विजय सिंह के हाथ से सरकार के जाते 2003 से कॉंग्रेस विपक्ष की भूमिका में रही । 2003में भाजपा की फायर ब्रांड और आज की लूप लाइन नेता साध्वी उमा भारती के करिश्माई नेतृत्व का परिणाम था कि मध्यप्रदेश में भाजपा ने स्थाई सरकार बनाई और उमा जी के सिर मुख्यमन्त्री का ताज रहा । मगर भाजपा की आदत कहे या उमा जी का भाग्य भाजपा ने उमा भारती के नाम पर मध्यप्रदेश की कुर्सी हासिल कर खुद उमा को कुर्सी विहीन कर दिया । हुगली कांड के नाम पर उमा भारती से गद्दी छीन बाबूलाल ग़ौर को सौंपी और उनसे छीन शिवराज सिंह को । और 12-13बरस शिवराज सरकार चली , जमकर घोटाले जमकर कांड हुए । किसानो पर गोली चली तो कही किसानो ने ख़ुदकुशी की । युवाओ की व्यापमं के नाम पर आहुति ली । 15 साल के भाजपा शासन की जनता ने नकार कर कॉंग्रेस को मौका दिया । और आज ही के दिन कमलनाथ सरकार अस्तित्व में आई ।
इस एक साल के अंतराल में कमलनाथ सरकार ने वादे अनुसार किसान कर्ज माफी का अभियान चलाया जो बदस्तूर जारी है । लेकिन इस अभियान में पत्रकारों को किया वादा कही दब गया । और नतीजा निकला कि बारम्बार घोषणा के बावजूद मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नही हुआ । और कमलनाथ सरकार के इस वादे के पूरे नही होने से आज एक साल होने की सालगिरह पर पत्रकार जगत अपने आप को ठगा मेह्सूस कर रहा है । बचा खुचा एक मात्र पत्रकार भवन भी कुछ लोभियों की लड़ाई में धाराशाही हो गया ।
जनसंपर्क संचालनालय द्वारा गठित अधिमान्य पत्रकार समितियों में हुई बंदरबांट से यह संदेश जाना कि सरकार जरूर कॉंग्रेस की बनी है परन्तु भाजपा और संघ मानसिकता के हाथों की कठपुतली है । विभागीय मंत्री की एक ना चलना इसी का प्रमाण है ।
15 साल तक पत्रकार बिरादरी भूमाफियाओं , अपराधियो , रेत खनन माफियाओं सहित पुलिस की प्रताड़नाओ का शिकार रहा । कमलनाथ सरकार के आने से एक आस बनी थी कि वादे अनुसार सरकार पत्रकार हित में उनकी सुरक्षा एवं कल्याण के लिए कौई कदम उठाएगी , परन्तु यह आस भी धूमिल हो रही है ।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति एवं प्रेस कौंसिल ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट की और से कमलनाथ सरकार के एक वर्ष होने पर बधाई और यही कामना है कि निकट भविष्य में “पत्रकार सुरक्षा कानून “जरूर लागू करेगी कमलनाथ सरकार ।
@सैयद ख़ालिद कैस 8770806210
