भोपाल । मध्य प्रदेश कमलनाथ सरकार की पत्रकार विरोधी नीति का ही परिणाम है एक साल बाद भी घोषणाओं के बावजूद प्रदेश में सुरक्षा कानून लागू नहीं हो पाया। जबकि कमलनाथ सरकार ने अपने घोषणा पत्र में पत्रकारों को आश्वासन दिया था “पत्रकार सुरक्षा कानून’ जो कि उनके घोषणा पत्र में वचन की तरह लिखा है । अपने वादे के अनुसार कमलनाथ सरकार प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करेगी ।
यह दुर्भाग्य का विषय है 1 वर्ष का लंबा अन्तराल गुजर जाने के पश्चात भी सरकार सुरक्षा कानून नहीं कर पाई। जनसंपर्क एवं विधि विधायी मंत्री पीसी शर्मा पत्रकारों को हमेशा ही आश्वासन देते हैं कि उनकी सरकार अपने वचन पत्र में किए गए वचन के अनुसार प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए तत्पर है । परंतु यह कोरे आश्वासन वास्तविकता की धरा पर खोखले साबित हो रहे हैं। जिस प्रकार कमलनाथ सरकार के आने के पश्चात जनसंपर्क संचनालय की नीतियां बनाई जा रही है उससे लघु और मध्यम वर्ग के पत्रकारों का दोहन किया जा रहा है। कमलनाथ सरकार की नीतियां पत्रकारों के लिए दमनकारी नीतियां है , जिसके कारण लघु और मध्यम वर्ग के समाचार पत्र पत्रिकाओं के संपादक आर्थिक रूप से टूट जाएंगे । यह कमलनाथ सरकार की नीति बड़े और व्यवसायिक घरानों को उत्साहित करने के लिए बनाई गई है। जिनको जनसंपर्क संचनालय द्वारा लाखों रुपए के विज्ञापन दिए जा रहे हैं। वहीं छोटे , सप्ताहिक , मासिक समाचार पत्र पत्रिकाओं के संपादकों को गणतंत्र दिवस पर मिलने वाले परंपरागत विज्ञापन तक से मोहताज किया गया है। पत्रकार विरोधी नीतियों के कारण ही संपूर्ण प्रदेश में सरकार के खिलाफ पत्रकार रुष्ट है तथा लगातार धरने प्रदर्शन कर बता रहे हैं कि लघु और मध्यम वर्ग के समाचार पत्र-पत्रिकाओं के प्रति दोगली नीति अपनाने के कारण यदि उनका दमन जारी रहेगा तो पत्रकार संगठन सरकार के खिलाफ संघर्ष के लिए सड़कों पर आएंगे।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति द्वारा लगातार कमलनाथ सरकार पर यह दबाव डाला जा रहा है कि
-पत्रकार सुरक्षा कानून अविलंब लागू किया जाए ।
– छोटे साप्ताहिक एवं मासिक समाचार पत्र पत्रिकाओं के संपादक को भी अधिमान्यता पत्रकारों की सूची में शामिल किया जाए ।
-पत्रकारों के हितों के लिए “पत्रकार कल्याण आयोग” की स्थापना की जाए।
-पत्रकारों को चिकित्सा क्षेत्र में आरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि बीमार होने पर पत्रकारों को भी चिकित्सा सुविधा लेने में आरक्षण , प्राथमिकता प्राप्त हो तथा वे आर्थिक रूप से अक्षम होने के पश्चात भी अपना उचित उपचार करा सके।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने यह भी मांग की है अधिमान्य पत्रकारों के अलावा गैर अधिमान्य पत्रकारों के लिए भी ऐसी नीति बनाई जाए जिसके माध्यम से जनसंपर्क संचनालय द्वारा परिचय पत्र प्रदान किए जाए ताकि पत्रकारिता जगत में कैंसर की तरह फैल रहे फर्जी पत्रकारों पर लगाम लगे तथा पत्रकारिता के गिरते स्तर को बचाया जा सके।
@सैयद ख़ालिद कैस 8770806210
