भोपाल -मुख्यमंत्री के तौर पर नाम की घोषणा के बाद कमलनाथ ने कहा, “यह पद मेरे लिये मील का पत्थर है। ज्योतिरदित्य का धन्यवाद जिन्होंने मेरा समर्थन किया। इनके पिताजी के साथ मैंने काम किया है इसलिए इनके समर्थन मिलने से मुझे खुशी हो रही है। अब हमारे सामने कई चुनौतियां हैं, हम सब मिलकर हमारा वचन पत्र पूरा करेंगे। मुझे पद की कोई भूख नहीं। मेरी कोई मांग नहीं थी। मैंने अपना पूरा जीवन बिना किसी पद की भूख के कांग्रेस पार्टी को समर्पित किया। मैंने संजय गांधी, इंदिरा, राजीव के साथ काम किया है और अब राहुल गांधी के साथ काम कर रहा हूं।
राजधानी में देर रात कांग्रेस विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई। भोपाल विमानतल पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं के पहुंचने पर जमकर नारेबाजी की। जय, जय कमलनाथ के नारों से एयरपोर्ट गूंज उठा। कमलनाथ और सिंधिया का जमकर स्वागत किया गया।
इससे पहले कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया गुरुवार सुबह दिल्ली पहुंचे। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आवास पर बैठक हुई। इसमें राहुल की बहन प्रियंका वाड्रा भी मौजूद थीं। इसके बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी भी राहुल से मिलने पहुंची थीं।
राहुल गांधी ने सिंधिया और कमलनाथ के साथ एक तस्वीर ट्वीट की। इसमें उन्होंने कहा कि समय और सब्र सबसे ताकतवर योद्धा होते हैं। उधर, ज्योतिरादित्य ने भोपाल रवाना होने से पहले कहा- ये कोई रेस नहीं है। ये कुर्सी के लिए नहीं है। हम सब यहां मध्यप्रदेश के लोगों की सेवा के लिए आए हैं।
ये कोई रेस नहीं और ये कुर्सी के लिए नहीं, हम यहां मध्य प्रदेश की जनता की सेवा के लिए है।
दिल्ली में जब कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री के नाम को फाइनल करने के लिए बैठक चल रही थी तो भोपाल में प्रदेश कार्यालय के बाहर सिंधिया समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। करीब चार दर्जन युवकों ने सिंधिया के होर्डिंग लेकर प्रदर्शन किया। उसके जवाब में कमलनाथ समर्थक भी मैदान में उतर आए। अभी तक दोनों पक्ष प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने जमे हुए हैं। नारेबाजी और हंगामा चल रहा है। हालांकि, नेताओं ने इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बताया है।
कमलनाथ के श्यामला हिल्स स्थित सरकार बंगले पर पुलिस इंतजाम बढ़ा दिए। यही नहीं, मुख्यमंत्री सुरक्षा के पुलिस अधीक्षक मनु व्यास ने भी वहां पहुंचकर सुरक्षा का जायजा लिया। बंगले के भीतर डॉग स्क्वॉड और बम स्क्वॉड की टीमों ने निरीक्षण किया। इसके बाद बंगले के भीतर आम आदमी को बिना सुरक्षा जांच के प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई।
दिल्ली में किसी एक नाम पर सहमति न बनने के कारण कांग्रेस विधायक दल की बैठक का समय पांच बार बदलना पड़ा। पहले यह बैठक शाम 4 बजे होनी थी। पहली बार इसे बढ़ाकर 5 बजे किया गया। फिर 6 बजे हुआ और रात साढ़े आठ बजे की सूचना आई, अंत में इसका समय 10 बजे का बताया गया। हालांकि शाम सात बजे तक कमलनाथ, सिंधिया व केंद्रीय पर्यवेक्षक, राहुल गांधी के बंगले से बाहर नहीं निकले थे।
प्रदेश में 28 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव के बाद बुधवार सुबह मतगणना समाप्त होने पर कांग्रेस ने 114 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है जो कि बहुमत के आंकड़े 116 से मात्र दो सीटें कम है। वहीं प्रदेश में पिछले 15 साल से सत्तारुढ़ दल भाजपा 109 सीटें हासिल कर दूसरे स्थान पर रही। प्रदेश में दो सीटों पर बसपा, एक समाजवादी पार्टी और चार सीटों पर निर्दलीयों ने विजय दर्ज की है। प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं।
