समाजसेविका कंचन किशोर सोनी ने निभाया बेटे का धर्म-माता की अर्थी को दिया कांधा किया तो छोटी बहन ने किया अंतिम संस्कार
गुना। सम्पूर्ण विश्व आज अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाकर बेटी के महत्त्व को समाज को सिखाने का प्रयास कर रहा था,उसी दिन मध्यप्रदेश के राघवगढ़ ज़िला गुना में बेटियोँ ने अपनी माता की अर्थी को ही कंधा नही दिया वरन पुरुष प्रधान समाज को यह भी जता दिया बेटियाँ किसी से कम नही होती।
गौरतलब हो कि ब्यावरा राजगढ़ के प्रसिद्ध समाजसेविका एवं नारी तो नारायणी शिक्षा, जनकल्याण समिति की अध्यक्षा श्रीमती कंचन किशोर सोनी की माता जी त्रिवेणी सोनी पत्नी स्वर्गीय शम्भू दयाल सोनी साडा कालोनी राघोगढ़ विगत कई माह से बीमार थी तथा उनका उपचार चल रहा था,परन्तु निरंतर गिरते स्वास्थ्य के कारण उनकी शारीरिक स्थिति बिगड़ती गई और अंततः आज उन्होंने अंतिम सांस ले ली।
मालूम हो कि दिवंगत माता जी की पांच पुत्रियाँ है।सीमा सोनी,कंचन सोनी ,नीतू सोनी,अवंतिका और स्वर्णलता सोनी। पुत्रियों ने अपनी माता त्रिवेणी सोनी को बेटे की कमी कभी महसूस नही होने दी और आज उनके देह त्यागने के बाद बेटे का धर्म बेटियों ने निभाया। मंझली पुत्री कंचन सोनी ने उनकी अर्थी को दिया छोटी पुत्री अवंतिका ने मुखग्नि भी देकर बेटी सहित बेटा बनकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर समाज को यह संदेश दिया कि बेटियाँ किसी से कम नही।बेटे की आस में बेटियों को कोख में मारने वालों के लिए यह एक सबक़ है कि बेटे की चाह में बेटियों का तिरस्कार मत करो, बेटियाँ बड़ी होकर बेटे के भी दायित्व निभाने से पीछे नही हटती।

