कांग्रेस की मानें तो चुनाव के साल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दनादन घोषणाएं करते जा रहे हैं जबकि ओवर ड्राफ्ट के मुहाने पर खड़ी राज्य सरकार के पास पैसा ही नहीं है ।
दरअसल, मध्य प्रदेश में इस साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं लिहाजा हर दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंच से घोषणाएं करते नजर आ रहे हैं. इस मामले पर कांग्रेस पूछ रही है कि इन सब घोषणाओं के लिए पैसा कहां से आएगा. क्योंकि सरकार की माली हालत ठीक नहीं है.।
कांग्रेस के प्रवक्ता मानक अग्रवाल कहते हैं कि मध्य प्रदेश के हालात खराब हैं. विकास होता नहीं पैसा पता नहीं कहां जा रहा है. इसके बाद ओवर ड्राफ्ट की तैयारी है. अब फिर चुनाव आ रहा है लगातार मुख्यमंत्री की घोषणाएं होती चली जा रही है. पैसा सरकार के पास नहीं है.
चुनाव के साल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने असंगठित मजदूरों के लिए संबल योजना शुरू की है, जिसपर 2500 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं. गरीबों के बिजली बिल माफ करने पर सरकार 2000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. सरकारी मुलाजिमों के सातवें वेतनमान का खर्चा 1500 करोड़ रुपए हैं. संविदा शिक्षकों को स्थायी करने पर राज्य सरकार का 2000 करोड़ का बजट है.
इसी तरह किसानों के बोनस और भावांतर जैसी योजनाओं पर सरकार 6000 करोड़ से ज्यादा खर्चा कर रही है. BJP सरकार मानती है कि हालत पतली है मगर उसे ओवर ड्राफ्ट की फ़िक्र नहीं है. सरकार के मुताबिक चुनाव के साल में कांग्रेस का काम मुद्दे बनाना है.
वित्त मंत्री जयंत मलैया कहते हैं कि मुख्यमंत्री हर साल कुछ ना कुछ नया लेते हैं. इस साल चुनाव के साल में असंगठित मज़दूर को लिया है उसमें भी हमारी रकम ज्यादा निकल रही है. लेकिन स्थिति हैं अभी ठीक है. अभी ओवर ड्राफ्ट नहीं है हो सकता है कि आगे पीछे चलकर ओवर ड्राफ्ट हो जाए. इसकी हमे चिंता नहीं है.
वहीं शिवराज की असंगठित क्षेत्र के लिए शुरू की गई संबल योजना में एक करोड़ 82 लाख रजिस्ट्रेशन हुए हैं, यानि मध्य प्रदेश की आबादी का करीब एक चौथाई. चुनावी साल में शिवराज सरकार के इरादे साफ हैं. एक बात औऱ साफ है कि अगली सरकार चाहे फिर बीजेपी की बने या कांग्रेस आ जाए, उसे बजट को पटरी पर लाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी.।
