वर्तमान समय में मध्य प्रदेश शासन का जनसंपर्क विभाग गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ है। जनसंपर्क विभाग को प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और विभाग के मंत्री पी.सी.शर्मा ने जकड़ा है। विभाग को सीएम कमलनाथ महाराजा तो पी.सी.शर्मा जागीरदार की तरह चला रहे हैं। ये दोनों नेता विभाग को खुद का साम्राज्य मानकर मनमर्जी स्थाापित किए हुए हैं। एक ओर जहां जिसे चाहे उसे लाखों की रेवड़ी बांट रहे हैं तो वहीं हजारों लोगों का विज्ञापन बंद कर रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और राजतंत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। जनसंपर्क के गठन 1956 से यह पहला अवसर है जब जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभाग में इतने बड़े स्तंर पर तानाशाही, राजशाही हावी है। कमलनाथ सरकार ने एक साल में विभाग की उपयोगिता और अस्तित्व को नेस्तनाबूत कर दिया है। विभाग को अपनी बपौती समझने वाले ये दोनों मुखियां पत्रिकारिता पर कुठारघात करने पर उतारू हैं। जो मीडिया संस्थान सरकार को सच्चाई का आईना दिखा रहे हैं उन्हें टारगेट किया जा रहा है। सरकार और सरकार के नुमाइंदों की आवभगत करने वाले संस्थांओं को परिष्कृत और विरोध या सच्चाई प्रकाशन करने वालों को तिरष्कृत किया जा रहा है।
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि मजबूत लोकतंत्र में मजबूत मीडिया का होना आवश्यक है। उनका इशारा शासनकर्ता को सच्चाई का आईना दिखाना था। उनका यह मानना था कि जब तक मीडिया सरकार की गलतियों और सच्चाई को प्रकाशित नही करेगा तब तक शासनकर्ता को कैसे पता चलेगा कि वास्तविकता क्या है। लेकिन प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने लोकतंत्र की परिभाषा ही बदल दी है। ये सरकार विज्ञापनों के माध्यम से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया पर प्रहार कर रही है। मैं पूछना चाहती हूँ कि कौनसे संविधान में लिखा है कि सच्चाई को प्रकाशित करना गुनाह है। यदि प्रकाशित सामग्री से किसी को ऐतराज होता है तो पहले नोटिस दिया जाता है। यह कौनसा कानून है कि उस संस्था को ब्लैक लिस्टेड किया जाता है। मेरे द्वारा प्रकाशित की जा रही द्विभाषी मासिक पत्रिका जगत विज़न को जनसंपर्क विभाग में ब्लैक लिस्टेड किया है तथा मेरी सारी सुविधाएं बंद की गई हैं। मेरा कसूर सिर्फ इतना था कि मैंने सच्चाई को प्रकाशित किया था। ये मेरा फर्ज था, कर्तव्य था। मैं पिछले दो दशक से पत्रिका का प्रकाशन कर रही हूँ और कई बार सरकार की सच्चाई को प्रकाशित किया है। लेकिन आज तक किसी भी सरकार ने ऐसे प्रहार नही किये। मेरे जैसे और भी कई लोग है जो सच्चाई को प्रकाशित कर रहे हैं उन्हें भी ऐसे ही सरकार द्वारा दबाया जा रहा है। ये सरकार का मीडिया की आवाज को दबाने का, कुचलने का प्रयास है। सरकार को लगता है कि इस तरह के बर्ताव से मैं चुप बैठ जाऊंगी, बिल्कुल नहीं बैठूंगी। अपनी लेखनी से आवाज उठाती रहूँगी।
