पचमढ़ी -ऐसा भी नही कि सरकार भुकमरी हो की सुविधाएं नही जुटाई जा सकती जुटाई जा सकती है महादेव.मेला समीति जो आयोजन समीति है उसके कोष मे करोड़ की जमा पूँजी.होने के बाद भी श्रृद्वालु दर दर की.ठोकरे खाने को आखिर क्यों मजबूर है। चाहे तो मेला समीति इन धार्मिक स्थलो से प्राप्त आय का सदुपयोग यहाँ धर्मशालाओ , सुलभ काम्पलेकस , पेईग गेस्ट सुविधाओं और भोजनालयो.की.सुलभ व्यवस्था मे खर्च कर सकती है पर ऐसा क्यो नहीं सवाल.दर सवाल लाजमी है पर ऐसा यदि हो जायेगा तो स्थानीय स्तर.पर यहाँ कू नेताओ की बडी बडी.होटलो मे कौन रुकेगा इन्हे कौन जय राम जी की करेगा और फिर कौन इनके सामने गिडगिडायेगा कि माई बाप ऐसा यहाँ. होना चाहिए । सवाल दर सवाल उठना लाजमी है आज धार्मिक और पौराणिक. इन.स्थलो का.परीक्षण किया जाये तो आप आयेगे कि.धार्मिक और अनादिकाल के यह पौराणिक धार्मिक स्थल जीर्ण शीर्ण अवस्था को प्राप्त हो रहे.है। और यह सब कुछ देखने के लिए धार्मिक चश्मा उतारकर ही इस आघात को बडे अच्छे से समझा जा सकता है। महादेव गुफा जो.पौराणिक और नैसर्गिक भगवान शिव की प्राचीन गुफा है का तो नक्शा ही प्रशासन. की नासमझी ने ऐसा बदला की गुफा से टपकने वाली पानी की प्राक्रतिक बूँदे ही बँद हो गई है। चौरागड की खूबसूरती और सुन्दरता ता मानो मदिर मे कैद.होकर मात्र दर्शन की.वस्तु बनकर रह गई है ।
यहाँ अपना निजी ट्रस्ट बनाकर मात्र कब्जा करने.की.मनोवृति ने महादैव.के सौन्दर्य को भी नहीं बख्शा ।बीते दिनो का महादेव और.चौरागड अब आधुनिकता की.चपेट मे.है.और प्रक्रति अपनी दुर्दशा पर आँसू भी नहीं बहा पा रही वक्त रहते यदि धर्म का चश्मा उतारकर इस आघात को नही समझा गया तो वह दिन भी दूर नहीं कि.सरकार को यहाँ भी पुरातत्व सर्वक्षण कराकर यह जानना.होगा कि यही था चौरागड और क्या यही था महादेव गुफा सवाल दर सवाल लाजमी है । और सरकार धृतराष्ट्र और प्रशासन अँधा कब तक बना रहेगा
मनोज दुबे अधिमान्येता पत्रकार पचमढ़ी
