श्रावण मास के दौरान नागपंचमी मेले मे श्रृद्वालुओं को सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा मे कारगर कदम ……. मनोज दुबे (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवँ ह्मयूमन राईट राष्ट्रीय महासचिव) लेखक वरिष्ठ पत्रकार है
पचमढ़ी प्रदेश और देश का ख्याति नुमा पर्यटन और धार्मिक स्थल रहने के बाबजूद न तो इस धार्मिक स्थल पर आयें लाखों आस्थावान श्रृदालुओ को किसी प्रकार की न तो स्थाई रुप से सुलभकाम्पलैस की व्यवस्थाएं है और न ही ठहरने और उचित मूल्य पर भोजन और निशुल्क धर्मशालाएं है कहने को वर्ष पर्यन्त पर्यटकों का.हूजूम सा लगा रहता है बल्कि क ई बडे राजनेताओं और उच्चाधिकारियों का आगमन भी यहां बना रहता है
परन्तु मध्यमवर्गीय पर्यटकों और श्रृदालुओ के सामने यहाँ किसी प्रकार की आज तक न तो मध्यप्रदेश सरकार ने और न ही जिले के प्रशासन ने कोई ठोस और कारगर उपाय इन श्रृदालुओ की.सुविधाओं के लिए ही यहाँ जुटाए बल्कि यह कहने मे जरा भी सँकोच नही की ……….पचमढ़ी के पानी की तासीर मे यह मिलावट है कि जब तक यहां कोई राजनेता या कोई उच्चाधिकारी यहां रहता है पचमढ़ी की तरक्की और उसके विकास की बडी बडी. बाते करता है और यहां की सरजमीं से दूर जाने के बाद वह सब भूल जाता है।पचमढ़ी मे निजी और प्राईवेट होटलों की.तो भरमार है और जिनकी होटलें है वे ही पचमढ़ी के रसूखदार नेता भी है जो अपने निजी हितों को साधते है ।कहने को यहाँ एक महादेव मेला समीति है जो पचमढी के धामिर्क स्थलों से वर्ष पर्यन्त नीलामी से लाखों रुपयों की बडी आय तो प्राप्त होती ही.है परन्तु धार्मिक स्थलो के विकास और श्रृदालुओ और पर्यटकों को स्थाई सुविधाए प्रदान करने की दिशा.मे कोई कारगर उपाय आज तक न किया जाना मेला समीति को सँदेह के घेरे मे ला खडा करता है ।
सूत्रों ने यह जानकारी दी कि महादेव मेला समीति के कोष मे इन धामिर्क स्थलों से प्राप्त आय करोडों मे है पर उस आय का उपयोग दीगर कार्यों मे कर मेला समीति अपना पल्ला झाडने के अतिरिक्त कुछ भी नहीं करती मेला पर्वों के दौरान जो लाखों लाख आस्थावान श्रृद्वालु यहाँ दर्शनार्थ आते है …वे भुग्तभोगी श्रृदालु ही सही मायने मे यहां की अव्यवसथाओ का सही मूल्यांकन करने मे सक्षम भूमिका का अवलोकन कर बता सकने.मे सक्षम है हमने इस सँदर्भ मे प्रदेश की धृतराष्ट्र सरकार और जिले के प्रशासन सहित महामहिम मध्यप्रदेश को भी अवगत कराया पर वाह् मध्यप्रदेश सरकार और मेला समीति और जिले का प्रशासन लकीर की फकीर नामचीन व्यवस्थाएं ऊँठ के मुहँ मे जीरे के समान श्रृदालुओ को व्यवस्था कर अपना.पल्ला झाडने के अतिरिक्त और क्या कर सकती है। श्रृदालुओ ने तो यहाँ तक बताया की ऐसा रमणीय और प्राकृतिक स्थल भारत के किसी भी पर्यटन स्थल को नसीब नही परन्तु सरकार की लापरवाही इसे नरक का रुप दे रही.है।
यहां आने के बाद लगता ही नहीं की हम देश के सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन और धामिर्क स्थल पर दर्शनार्थ आये हैं.. सतपुड़ा की रानी.पचमढ़ी का सारा.सौन्दर्य बस होटलो की.भरमार मे सिमट कर रह गया है…..
आवश्यकता. इस.बात की है कि शिरणी के साँई.बाबा दरबार , अथवा अमरनाथ और मैहर की तर्ज पर यहाँ का विकास किया जाये जिससे यहाँ किसी हद तक बेरोजगारों को रोजगार भी मिलेगा सरकार की आय भी बढेगी और नेतागिरी और मनमानी का.अँत भी.होगा ।
सरकार क्या इस दिशा मे कारगर उपाय ब्लूप्रिंट तैयार कर धामिर्क और.पर्यटन स्थल के अनुकूल विकास करेगी या मध्य क्षेत्र के किसी मसीहे को जन्म लेना होगा जो विकृतियाँ आज यहां दिखाई दे रही.है धार्मिक स्थलो से पुजारियों की मनमानी पर रोक अथवा जिन्होंने धर्म की आड मे अपना ट्रस्ट बना लिया उसे सरकार शीघ्र बर्खास्त कर सरकार धामिर्क स्थलो को अपने. सँरक्षण. मे ले चौरागड और महादेव ,जटाशंकर सहित अन्य सभी धामिर्क स्थलो को.सरकार अपने कब्जे मे ले और सँरक्षित कर यहां का विकास करे तो सरकार की आय बढेगी रोजगारों को बेरोजगारी की दिशा मे भी एक समस्या का स्थाई हल भी मिलेगा ।
देखना यह भी है की सरकार और प्रशासन कितना जागरूक है अथवा ऊँठ किस.करवट बैठता है श्रृदालुओ और.पर्यटकों को सुविधाएं मिलेगी और यहां की मनमानी पर एक बडा अँकुश भी लग.सकेगा ।सरकार और जिले का प्रशासन ध्यान दे।
