चंडीगढ़ । 2019 में होने वाले 17वीं लोकसभा के चुनाव से पहले राजनीतिक दल दमखम के साथ तैयारी में जुट गए हैं। 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनावी परिणाम कई मायनों में महत्वपूर्ण थे। 2004 से 2014 तक सत्ता में रही यूपीए सरकार अब बाहर हो चुकी थी और नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार नई उम्मीदों के साथ केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई।
2014 का चुनाव इसलिए भी खास था कि एनडीए गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने के साथ ही भाजपा अकेली पार्टी के रूप में सामने आई जिसने अपने बलबूते 272 के जादुई आंकड़े को छू लिया था। भाजपा की ये जीत,1984की उस जीत की याद दिला दी जब कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।1989 से लेकर 2014 के कालखंड में अलग अलग विचारधाराओं की सरकार बनी लेकिन 272 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए समान विचारधारा वालों या उस समय की जरूरत को ध्यान में रखते हुए मदद लेनी पड़ी। 2014 की जीत से भाजपा जबरदस्त उत्साह में है और पार्टी अपने प्रदर्शन को आगे भी जारी रखने की कवायद में जुट गई है। मिशन 2019 के जरिए जहां भाजपा ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से युवा उद्घोष का आगाज किया,वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हरियाणा से चुनावी बिगुल फूंकने जा रहे हैं।
