छतरपुर। मृत व्यक्ति की जगह खुद मृत व्यक्ति बनकर लाखो की जमीन हेरफेर करने के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने मामले के एक आरोपी को पांच साल की कठोर कैद, 17 हजार रुपए के जुर्माना और दूसरे आरोपी को तीन साल की कठोर कैद के साथ पांच हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई। साथ ही मामले के दो सहआरोपियो को बरी कर दिया। मामले के एक आरोपी को पुलिस अभी तक पकड़ नही पाई है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि 12 सितंबर 2011 को फरियादी प्रोपर्टी डीलर दुर्गेश खरे ने एसपी छतरपुर को इस आशय की शिकायत की। उसके पास रतनगंज मोहल्ला बिजावर का रहने वाला संतोष पिता एचडी यादव आया था। संतोष के साथ एक अन्य व्यक्ति था जिसका नाम संतोष ने नंदकिशोर पिता गोविंददास अहिरवार निवासी सौरा रोड छतरपुर का बताया था। संतोष ने कहा कि नंदकिशोर के नाम ग्राम सौरा में भूमि खसरा नं. 1076/2, 1077/1, 1078/2, 1079/1, 1080/1 कुल रकवा 1.958 हेक्टेयर है और वह अपनी जमीन को बेचना चाहता है। इस जमीन को बेचने के लिए नंदकिशोर ने संतोष के नाम मुख्तयार नामा भी लेख करा दिया है। वहां मौजूद नंदकिशोर नाम के व्यक्ति ने 26 फरवर 2010 को पंजीयक कार्यालय से लेख कराया रजिस्टर्ड मुख्तयारनामा दुर्गेश को दिखाया। मुख्तयार नामा में संतोष और नंदकिशोर नाम बताने वाले व्यक्ति की फोटो लगी थी और जयकुमार खरे निवासी लौड़ी, लक्ष्मण द्विवेदी निवासी देरी रोड छतरपुर मुख्तयार नामा में गवाह थे। दुर्गेश खरे ने मुख्तयार नामा को तस्दीक करने के लिए पंजीयक कार्यालय जाकर जानकारी प्राप्त की। यह मुख्तयार नामा पंजीयक कार्यालय से क्र.252 पर रजिस्टर्ड होना पाया। फरियादी दुर्गेश ने मुख्तयारग्रहिता संतोष यादव को 40 लाख 60 हजार रुपए देकर 21 अक्टूबर 2010 को उक्त जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली।
मृत व्यक्ति की जगह दूसरे ने कराई रजिस्ट्री–
बाद में दुर्गेश खरे को पता चला कि संतोष यादव और कुछ अन्य लोगों ने साजिश करके फर्जी मुख्तयार नामा बनवाया है जबकि नंदकिशोर अहिरवार की मौत मुख्तयार नामा तैयार होने के पहले ही हो चुकी थी। एसपी के आदेश पर सिटी कोतवाली थाना में लक्ष्मण द्विवेदी, जयकुमार खरे, संतोष यादव, पंचम उर्फ पंचू नामदेव और जीतेंद्र सिंह के खिलाफ फर्जी वाड़ा का मामला दर्ज किया गया। तत्कालीन निरीक्षक ओएस चंदेल ने विवेचना करके मामला कोर्ट में पेश किया।
जांच में अंगूठो के हुए मिलान–
एसपी कार्यालय छतरपुर में पदस्थ एसआई पवन वर्मा अंगुल चिन्ह विशेषज्ञ के पास मुख्तयार नामा जांच करने भेजा गया। जांच में सामने आया कि फर्जी मुख्तयार नामा में जो अंगूठे लगे है वह आरोपी संतोष यादव और पंचम नामदेवी के अंगूठे है। पंचम नामदेव ने खुद को नंदकिशोर बताकर मुख्तयार नामा में अपना अंगूठा निशान लगाया था।
न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने अलग अलग धाराओ में सुनाई सजा-
एजीपी अरुण देव खरे ने अभियोजन की ओर से कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके गुप्त की अदालत ने मंगलवार को अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी संतोष यादव और पंचम नामदेव को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आरोपी संतोष को आईपीसी की धारा 467 में 5 वर्ष की कठोर कैद दस हजार रुपए जुर्माना, धारा 468 में 3 साल की कठोर कैद दो हजार रुपए जुर्माना, धारा 420 में 3 साल की कठोर कैद तीन हजार रुपए जुर्माना और धारा 120बी में 2 साल की कठोर कैद दो हजार रुपए जुर्माना की सजा दी। साथ ही आरोपी पंचम को धारा 467 में 3 साल की कठोर कैद तीन हजार रुपए जुर्माना, धारा 120बी में 2 साल की कठोर कैद दो हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। साथ ही मामले के सहआरोपी लक्ष्मण अनुरागी और जयकुमार खरे को मामला प्रमाणित न होने पर बरी कर दिया। गौरतलब है कि इस मामले का एक आरोपी शांतिनगर काॅलौंनी छतरपुर निवासी जीतेंद्र पिता गोविंद सिंह बुंदेला आज भी पुलिस की गिरफ्त से फरार है।
