खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता)@9893998100
मध्य प्रदेश/छतरपुर जिले की नौगांव जनपद पंचायत के बुड़बक पंचायत उस समय जिले एवं प्रदेश मैं वाहवाही की तस्वीरें सामने आई जब छतरपुर कलेक्टर के सोशल मीडिया फेसबुक अकाउंट पर 11 मई को दो तस्वीरों के साथ एक खबर पोस्ट की गई खबर इस प्रकार है l
कोरोना संकट में “मनरेगा” ने बढ़ाया मज़दूरों का हौसला”
कोरोना वायरस के वैश्विक संकट के समय महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम उन लोगों के लिये वरदान साबित हुई है, जो रोज मेहनत कर कमाते और खाते हैं।

छतरपुर जिला प्रशासन द्वारा सतत प्रयास द्वारा ज्यादा से ज्यादा मज़दूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी क्रम मे ग्राम बुड़रख में कपिलधारा कूप उपयोजना के तहत नवीन कूप निर्माण कार्य किया जा रहा है साथ ही ग्राम बुड़रख,पाटन, पुरवा बमोरी एवं बर्रोही मे खेत तालाब निर्माण कार्य भी किया जा रहा है।
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खबर प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर कलेक्टर छतरपुर के फेसबुक पेज पर कुछ पत्रकारों ने प्रतिक्रिया स्वरूप कमेंट भी किए । लेकिन इस संबंध में जो पड़ताल की गई तो मामला घोटाले की ओर इशारा करता नज़र आया ।
प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम पंचायत बुड़बक के सचिव सुनील पाठक ने ही मशीनों द्वारा पूर्व में काम कराया गया था ओर उसी के निशान मिटाने के लिए मनरेगा के मजदूर भी लगाए गए । इसकी जांच उपरांत जब हम हकीकत जानने पड़ताल करने गए तो ज्ञात हुआ कि ग्राम पंचायत बुड़बक के सचिव सुनील पाठक वर्ष 2010 में ग्राम पंचायत मलका में निर्वाचित सरपंच के साथ भ्रष्टाचार में लिप्त पाऐ गये थे जिनको अनुविभागीय अधिकारी नौगांव ने प्रकरण क्रमांक 3 /आ- 09 (अ-9) 2012-12 में पारित आदेश दिनांक 14.08.2014 में पदच्युत करते हुऐ राशि वसूली के आदेश किए थे ।
जिसके विरुद्ध न्यायालय अपर कलेक्टर जिला छतरपुर मध्य प्रदेश में अपील प्रस्तुत की थी। अपील क्रमांक 67 /अ–89(अ-9)/2013 श्रीमती विद्या पत्नी चंदूलाल साहू निवासी ग्राम मलका तहसील नौगांव जिला छतरपुर ग्राम मध्यप्रदेश शासन आदेश दिनांक 21 नवंबर 2014 तारीख को पद से पृथक एवं शासकीय राशि वसूलने के संबंध में था जो कि न्यायालय अपर कलेक्टर जिला छतरपुर मध्य प्रदेश के द्वारा अधीनस्थ न्यायालय का अभिलेख इस न्यायालय की वास्ते बुक क्रमांक 242 /14/05/2016 को भाग दो से भेजा गया । पावती श्री पटेल ताराचंद द्वारा प्राप्त की गई ।
लेकिन इस संबंध में कार्यालय अनुभाग अधिकारी (बीवी गंगेले )से इस संदर्भ में कार्यालय में जाकर आदेश दिखा कर भी यह जानना चाहा कि अपर कलेक्टर के आदेश के अनुपालन में पद से पृथक कर आदेश राशि की वसूली हुई या नही ?
जनपद पंचायत सीईओ हरीश केसरवानी एवं पूर्व सीईओ मज़हर अली से भी इस संबंध में बात की गई थी लेकिन अपर कलेक्टर के पारित आदेश के पालन में वसूली नहीं हुई।
इस संबंध में जिला पंचायत कार्यालय छतरपुर में सूचना के अधिकार में भी जानकारी चाही गई थी । लेकिन कार्यालय ने पत्र क्रमांक /3346/ सूचना का अधि/जि.प./2017 छतरपुर दिनांक 08/08/2017 मैं ऐसा कोई मामला संज्ञान में होने से इनकार करते हुए पत्र जारी कर दिया एवं डाक से एक सूचना पत्र नौगांव कार्यालय के संबंध में भी जारी कर जानकारी उपलब्ध कराने के लिये निर्देशित किया।
परन्तु इसे दुर्भाग्य कहें या अनियमितता यहाँ से भी कोई भी जानकारी देने को तैयार नहीं हुआ । इस मामले को दबाने का राजनीतिक दबाव इतना था कि अपर कलेक्टर न्यायालय से पारित आदेश पर अधीनस्थ कारवाई तो दूर उसे सम्बन्ध में जानकारी उजागर होने से भी लगातार बचते रहे ।
गौरतलब हो कि अपर कलेक्टर द्वारा पद से पृथक कर शासकीय धन की वसूली के आदेश से दण्डित ग्राम पंचायत बुड़बक के सचिव सुनील पाठक के दोषी होने के उपरांत भी सूत्र बताते हैं संबंधित व्यक्ति के पास पिस्टल जैसे शस्त्र का लाइसेंस भी बन चुके हैं ।
वैसे बुंदेलखंड में यह कहावत आम है कि “कद्दू कटेगा तो सभी को बटेगा “।
जहां-जहां ग्राम पंचायत बुड़बक के सचिव सुनील पाठक रहे वहां भ्रष्टाचार चरम पर रहा और अभी भी यह इसी मामले में कलेक्टर छतरपुर की छी छी लेदर सोशल मीडिया पर भी हुई।
मशीनों से हो रहा काम , मनरेगा का होता सिर्फ नाम
सरकार मनरेगा द्वारा गरीब मजदूरों के दो बक्त की रोटी के लिए काम सुरु किया लेकिन पूरा काम मशीनों से करवा लिया और विभाग में फोटो भेज कर वह वही बटोरने में लगे है,वही 2 साल पुराना कुआ जो अभी कच्चा है उसे कपिल धारा में पास कर लिए मोके पर कोई काम नही हुआ और लगभग 12,892 रुपये के मस्टर चलाये जा चुके है कुआ पुराना, पहले से ख़ुदा हुआ,मौके पर कोई काम नही हुआ फिर ये राशि कहा ठिकाने लगाई गई,जा रही है साथ ही खेत तालाब के काम भी मशीनों द्वारा कराए गये लेकिन लेकिन निशान अभी तक बने रहे आखिर जिन मजदूरों के लिए मनरेगा चालू हुई उनको रोटी कोन देगा कोरोना जैसी महामारी में भी इन गरीबो का हक ऐसे ही मार दिया जायेगा।
सेक्रेटरी एवं सरपंच से भ्रष्टाचार की शासकीय राशि वसूल पाना अधिकारियों के बस की बात नहीं राजनीतिक संरक्षण प्राप्त सेकेट्री ।
