नई दिल्ली -बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) उप-समिति (3: 1) का कहना है,कि सांसद , विधायकों को कानून का अभ्यास करने की अनुमति दी जानी चाहिए
बीसीआई उप-समिति के चार सदस्यों में से तीन बीसी ठाकुर, आरजी शाह, डीपी ढाल का विचार है कि -सांसदों, विधायकों और एमएलसी को अभ्यास करने की इजाजत दी जा सकती है। एक सदस्य एस प्रभाकरन ने कहा कि हितों के टकराव और लाभ के पद के चलते उन्हें रोका जाए।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा गठित एक उप-समिति के चार सदस्यों में से तीन ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि विधायकों-सांसदों और एमएलसी को कानूनी अभ्यास से नहीं रोका जाना चाहिए।
इसके बाद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस पर व्यापक परामर्श और चर्चा के लिए “अंतिम निर्णय” एक हफ्ते के लिए स्थगित कर दिया है।
राजस्व अधिवक्ता कल्याण परिषद मप्र के प्रांतीय अध्यक्ष सैयद खालिद कैस एडवोकेट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मांग की है सासंद , विधायकों को तो कानून अभ्यास अर्थात वकालत से रोका जाना नितांत आवश्यक है , इसी प्रकार सेवानिवृत्ति के बाद वकालत के पैशे में आने वाले सेवानिवृत्त जजों , सरकारी अधिकारियों , आई ई एस , आई पी एस व अन्य लोक सेवकों को अपनी नौकरी समाप्त होने के बाद वकालत के पैशे में आने से रोकना जरूरी है , क्योकि इस तरह के लोकसेवा पैशन व अन्य लाभ भी प्राप्त करते हैं और वकालत भी करते हैं । यदि ऐसे लोकसेवक वकालत करना चाहे तो सेवानिवृत्त होने के बाद उनको मिलने वाली पैशन व अन्य लाभो का त्याग करना चाहिये । लाभदायक सुविधाएं लेने वाले पैशनधारी वकालत के पैशे में आकर नौजवान पीढ़ी के साथ कुठाराघात करते हैं ।
