सय्यद ख़ालिद कैस की रिपोर्ट@9009217594
भोपाल -अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली के कारण चर्चित भोपाल नगर पालिका निगम चुनाव आचार संहिता लग जाने के बावजूद फ़िर एक और संदिग्ध योजना आरम्भ करने जा रही है जो अमल में आने से पूर्व ही सन्देह के घेरों में घिरी लग रही है । प्राप्त जानकारी अनुसार इस योजना में भी भारी भ्रष्टाचार उजागर होने के पुख़्ता सबूत मौजूद हैं ।
सूत्रो के हवाले से बताया जा रहा है कि राजधानी भोपाल में सेंसरवाली “स्टार्ट-डस्टबिन”अगले हफ्ते से 1350 करोड़ रुपये की लागत से लगने वाली है। उक्त योजना की कार्यप्रणाली के बारे मैं बताया जा रहा है कि यह “स्मार्ट डस्टबिन रेडियो फ्रिकवेंसी आईडेंटिफिकेशन” तकनीक पर काम करेगी इससे “रेडियो फ्रिकवेंसीज” से “सिग्नल कंट्रोल रूम” तक पहुंचेंगे।डस्टबिन भरने के बाद सबसे पास में मौजूद “कचरा वाहन” को सूचना मिलेगी “कचरा वाहनों पर जीपीएस लगा होने से यह सूचना भी उन्हें कंट्रोल रूम से मिल जाएगी।”
निगम का कहना है कि वाहन कितनी देर में पहुंचेगा या उससे कचरा कलेक्शन सेंटर पर किया या नहीं इसकी भी जांच होगी-
“मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मुख्य मार्गो और बाजारों में रियल टाइम कचरा कलेक्शन वाली स्मार्ट डस्टबिन लगाई जायेंगी” जिनका कामकाज अभी से कोरी कल्पना हैं। बताया गया है कि अगले सप्ताह स्मार्ट सिटी कंपनी के दफ्तर के गेट से इसकी शुरुआत की जायेगी ।
कहा जा रहा है कि लगभग पूरे शहर में ऐसे ही 150 डस्टबिन लगाने का अनुमान है इस पर लगभग साढे ₹13 करोड़ खर्च होने जा रहे है।
” एंड अश्विन को स्मार्ट सिटी कंपनी के control-m कमांड सेंटर” से जोड़ा जाएगा
मीडिया को कहानी ये सुनाई जा रही हैं कि इसमें कचरा भरते ही कंट्रोल रूम पर जानकारी आएगी और यहां से कचरा वाहन को सूचना भेजी जाएगी वाहन इस डस्टबिन को खाली करके कचरा आदमपुर छावनी कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाएगा। इतना ही नहीं कचरा वाहन इसे पानी से धोकर खाली करेगा।
यह डस्टबिन जमीन के नीचे गड्ढा खोदकर गाड़ी जाएगी ताकि कचरा डस्टबिन में ही जाए डस्टबिन की जगह इन पर नजर साईन आएगा जैसे ही कोई व्यक्ति वहां कचरा फेंका तो सेंसर बोर्ड उस दिन का ढक्कन अपने आप खुल जाएगा और यहां कचरे का ऑटोमेटिक इरिगेशन भी होगा।
“हम यहाँ आपको इस डस्टबिन के बारे में बता रहे हैं यदि आपको याद हो तो इसी प्रकार की एक फिल्म भी आई थी अलीबाबा चालीस चोर और उस गुफा का द्वार भी इसी डस्टबिन की तरह अपने आप खुल जाता था मगर उन 40 चोरों को यह जानकारी नहीं थी कि वहां पर बैठा एक अलीबाबा जो उसका पासवर्ड जान लेता है और उस गुफा में भी घुस जाता है।”
हमारे कहने का तात्पर्य है करोड़ों रुपए लागत से लगने वाली डस्टबिन का रखरखाव मेंटेनेंस किस तरह किया जाएगा के ये 5 सालों तक जिंदा रह पायेगा ? क्या ऐसा होना संभव है ? या स्मार्ट सिटी के नाम से जनता की गाढ़ी कमाई को अफसर अपनी दिवाली मनाने के लिए यह खर्चा कर रहे हैं ?
