भोपाल। आज से 5 वर्ष पूर्व देश की राजधानी दिल्ली में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई, जिसमे दरिंदो ने दरिंदगी की सारी सीमाएं पार कर के समाज को झकझोर दिया था, देश की आजादी के 70 साल बाद भी नारी की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वाली इस घटना ने सम्पूर्ण देश में विचार मंथन उपरांत ये बात ज़ाहिर कर दी कि आधुनिकता की काली छाया के बीच आज भी नारी उतनी ही अबला है जितनी पुरातन काल से देखी जाती रही हैं ।
बदलाव केवल कानून के अस्तित्व में आने से नारी शक्ति के नाम पर ढ़िढोरा पीटने ओर महिला सुरक्षा के नाम पर कानून बनाने तक ही सीमित दिखता है ।
आज निर्भया कांड को 5 वर्ष गुजर गए धरना प्रदर्शन हो हल्ले के बाद कानून नामक चाबुक चलने के बावजूद भी आज समाज मे हज़ारो निर्भया प्रति वर्ष दरिंदगी की शिकार हो रही है ।
निर्भया के दोषियों को मिली सज़ा के पश्चात उसके परिवार को मिले ज़ख़्म हर वर्ष हरे हो जाते है, हर रोज़ सेकड़ो निर्भया कभी दरिंदगी की शिकार तो कभी कानून की मार से अपने लहूलुहान शरीर को लिए समाज से सिर्फ एक ही सवाल करती नज़र आती है।
क्या नारी होना पाप है…….?
गत माह भोपाल में भी एक निर्भया दरिंदगी की शिकार हुई उसमे उन दरिंदो से अधिक वो खाकी वर्दी वाले थे जिन्होंने उस मासूम की मदद करने के स्थान पर उसका उपहास उड़ाया, पुलिस के इस घिनोने चेहरे ने पुनः एक बार ये साबित कर दिया कि कानून वास्तव में अंधा होता है ।
सार्थक मीडिया एंड पब्लिकेशन्स एवं खबरें आज तक न्यूज़ पोर्टल परिवार श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये ये आशा करता है कि देश मे नारी को सम्मान के साथ साथ सुरक्षा भी मिले ये तभी सम्भव है जब कानून के प्रति पुलिस तथा पब्लिक अटूट आस्था रखे ।
जय हिंद जय भारत
सरोज जोशी
