पत्नी से इतना प्रताड़ित हुआ कि अब प्रताड़ित पतियों के लिए खोल लिया एनजीओ, निःशुल्क विधिक सहायता भी दे रहा
उज्जैन। आजकल के परिवेश में हम अधिकतर देखते हैं और मानते भी हैं कि पत्नी के साथ ससुराल में क्रूरता होती है पत्नियां ही प्रताड़ित होतीं हैं। क्या कोई पति व उसका परिवार भी पत्नी से प्रताड़ित होते हैं? इसके बारे में समाज की आम धारणा है कि पुरुष प्रताड़ित नहीं हो सकता। लेकिन उज्जैन शहर का एक इंजीनियर पत्नी से इतना प्रताड़ित हुआ कि अब प्रताड़ित पतियों के लिए *सारथी समर्थ परिवार कल्याण समिति (रजि.)* एनजीओ खोल लिया है, जहां वह निःशुल्क विधिक सहायता भी दे रहे हैं। वहीं अपनी पत्नी के खिलाफ पति ने खुद केस लड़ा और हाइकोर्ट ने उसे तलाक के लिए हकदार माना।
उज्जैन निवासी अंकुर सीरौटिया का विवाह 2013 में उज्जैन नगर निगम में सहायक संपत्तिकर अधिकारी (वर्तमान में रिटायर्ड) राजेन्द्र शर्मा की बेटी रुचि से हुआ था। विवाह के 11 माह बाद रुचि 2014 में ससुराल छोड़कर मायके आ गयी और वहां रहकर उसके द्वारा पति व ससुरालवालों के ऊपर मनगढंत आरोप लगाकर पति व ससुराल वालों के ऊपर महिला थाना में दहेज प्रकरण में फंसाने का प्रयत्न किया गया। जब महिला थाने ने दोनों पक्षों को समक्ष बैठाकर सुना तो आधारहीन आरोपों के कारण कार्यवाही निरस्त कर दी गयी। पत्नी रुचि इतने पर भी नहीं मानी और पति पर 2016 में बदले की भावना से, भरणपोषण का दावा लगाकर मोटी रकम ऐंठने का प्रयास किया, तत्पश्चात जब पति ने स्वयं केस की पैरवी की, तो खुद का केस कमजोर पाते देख और स्वयं के दोषों का लाभ लेने के लिए, रुचि ने पति पर वैवाहिक संबंधों की पुनर्स्थापना की याचिका लगाकर न्यायालय के समक्ष सहानुभूति हासिल करने का असफल प्रयास किया।
पति द्वारा पत्नी की इस तरह की क्षण प्रतिक्षण विविध मानसिकता और क्रूरतापूर्ण व्यवहार से तंग आकर, मजबूरन न्यायालय में विवाह विच्छेद की याचिका दायर की गई। कुटुम्ब न्यायालय उज्जैन द्वारा, स्वयं को अध्ययनरत बता रही पत्नी का भरणपोषण का दावा, पत्नी के कार्यरत रहने संबंधी तथ्य को सिद्ध पाते हुए निरस्त किया गया और पति की विवाह विच्छेद व पत्नी की वैवाहिक संबंधों की पुनर्स्थापना विषयक याचिका को एक साथ निराकृत करते हुए, पति की विवाह विच्छेद याचिका को पत्नी द्वारा की गई क्रूरता के आधार पर सिद्ध पाते हुए जयपत्र पारित कर, पत्नी की वैवाहिक संबंधों की पुनर्स्थापना विषयक याचिका को निरस्त कर दिया गया।
इन सब प्रकरणों के चलते पति अंकुर ने अपने पिता के असमय देहांत होने के कारण, परिवार में माताजी व दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी निभाई। इतना ही नहीं खुद विधि की शिक्षा पूर्ण की और समाज को जागरूक करने के लिए, अन्य प्रताड़ित पतियों के साथ मिलकर एक एनजीओ स्थापित किया और लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता देना प्रारंभ कर दिया, जो आज भी जारी है। रुचि द्वारा हाल ही में कुटुम्ब न्यायालय के फैसले को इंदौर हाइकोर्ट में चुनौती दी गयी। जहां उसके द्वारा शर्त रखी गयी कि पति साथ रखे नहीं तो 35 लाख की एलिमनी दे। वहां भी रुचि द्वारा नियुक्त वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलों के बीच न्यायालय के समक्ष पति अंकुर द्वारा अपना पक्ष स्वयं रखा गया और हाइकोर्ट ने पत्नी को क्रूरता और परित्याग करने का दोषी पाते हुए, न्यायनिर्णयन पारित कर पति को क्रूर पत्नी से तलाक का हकदार पाते हुए, कुटुम्ब न्यायालय उज्जैन के निर्णय का समर्थन किया और पति अंकुर को यह साबित करने में सफल माना कि-
1. पत्नी क्षण प्रतिक्षण विविध मानसिकता की महिला है।
2. पत्नी ने पति व ससुराल वालों के साथ संबंधों का अनादर किया।
3. पत्नी ने मेहमानों के साथ भी अनादर व दुर्व्यवहार किया।
4. पत्नी कार्यस्थल पर जाने का कहकर मायके जाकर रहना सिद्ध पाया।
5. पत्नी द्वारा आत्महत्या की धमकी देना सिद्ध पाया।
6. पत्नी द्वारा पति को वैवाहिक सुखों से वंचित रखना सिद्ध पाया।
7. पत्नी द्वारा पति को बगैर किसी युक्तियुक्त कारण के 2 वर्षों से अधिक समय तक परित्याग करना सिद्ध पाया।
उपरोक्त बिंदुओं को क्रूरता के अंतर्गत मानते हुए हाइकोर्ट की डिवीजन बैंच द्वारा पति को विवाह विच्छेद पाने का अधिकारी पाया गया और पत्नी के किसी भी तरह की एलिमनी की मांग खारिज कर दी।
अंकुर के अनुसार आज अधिकांश लोग अपने कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं है, देश में पुरुषों की सुनवाई करने के लिए किसी प्रकार का कोई आयोग नहीं है। महिला कानूनों का दुरुपयोग आज चरम पर है, हम आये दिन अखवार में खबर पढ़ते हैं कि पत्नी से तंग आकर पति ने आत्महत्या कर ली। पति करे तो करे क्या?
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार हर 8 मिनिट में एक पुरुष आत्महत्या कर रहा है। पति दबाब में हैं, उनके साथ पति की माता, बहनें, चाची, दादी, सहित समस्त महिला परिजन चाहे सीनियर सिटीजन हों या किसी भी बीमारी से ग्रसित हों, परन्तु उनके महिला अधिकारों का दमन पत्नी रूपी एक महिला द्वारा किये गए कानूनी दुरुपयोग में होता है। इसलिए मेरी मांग सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं है बल्कि सीनियर सिटीजन माता पिता सहित परिवार की अन्य महिलाओं के कानूनी अधिकार की रक्षा की आवश्यक्ता है।
हम संगठित होकर अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। हम साप्ताहिक बैठकों द्वारा परिवारों को किसी भी तरह के कानूनी दुरुपयोग के समय उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक कर रहे हैं ताकि और कोई आत्महत्या न करे और मजबूती से अपनी लड़ाई लड़े। हमारी मांगों में प्रमुख मांग पुरुष आयोग का केंद्र, राज्य व जिला स्तर पर गठन कराना है।
जो भी इस प्रकार के प्रकरणों से परेशान है या आशंका में है वह हमारे अंतरराष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 8882498498पर सम्पर्क कर सकते हैं और साप्ताहिक मीटिंग में आकर निःशुल्क विधिक सहायता का फायदा ले सकते हैं।
