मध्यप्रदेश की उप नगरी इंदौर में आज पत्रकारों की बड़ी संस्था स्टेट प्रेस क्लब, मप्र के तत्वाधान में चल रहे तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में आज अंतिम दिन है।आज भविष्य की मीडिया शिक्षा,कोरोनाकाल में पत्रकारिता पर चर्चा उपरान्त सांस्कृतिक कार्यक्रम और कोरोना वारियर्स का सम्मान समारोह रवींद्र नाट्य गृह में आयोजित होना है।तीन दिवसीय इस पत्रकार महाकुंम्भ में शासन,पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी के साथ वरिष्ठ पत्रकारों ,आयोजकों ओर अतिथियों ने अपने विचार रखे। परन्तु इस तीन दिवसीय पत्रकार महाकुम्भ में “पत्रकार सुरक्षा और कल्याण पर कोई चर्चा नही हुई। किसी ने भी पत्रकारों की प्रताड़नाओं, आर्थिक स्थिति और संकटमय माहौल पर प्रकाश नही डाला।सम्भवतः यह उनका विषय न रहा।सम्भवतः यह भारतीय पत्रकारिता महोत्सव का भी विषय न हो।परन्तु मध्यप्रदेश में पत्रकारिता ओर पत्रकार आज जिस स्थिति में हैं मेरे विचार से इस भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में इन विषयों का ज़िक्र होना ज़रूरी था। महज पत्रकारों को इकठ्ठा करके अतिथियों को सम्मानित करने मात्र से पत्रकार महोत्सव पूर्ण नही हो जाता। आज प्रदेश का पत्रकार जिस पीड़ा का सामना कर रहा है उससे कोई अंजान नही।यह अलग बात है कि कारपोरेट मिडिया हाउस को इस बात से कोई सरोकार नही है। सरोकार तो उनको भी नही है जो शीर्षस्थ स्तर पर पत्रकारिता करते हैं क्योंकि न तो उनको सुरक्षा की चिंता होती है और न उनको कल्याण की आवश्यकता। प्रभावित तो है ग्रामीण ,दूर दराज़ ओर अपनी जान हथेली पर रखकर पत्रकारिता करते है या कर रहे हैं।
“पत्रकार देश का शिल्पकार होता है और वह समाज को आईना दिखाता है”
कल के कार्यक्रम में अपने उदबोधन में इंदौर रेंज के
डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने कहा था कि “सत्य को उद्घाटित करता है और मोमबत्ती की तरह जलता है वही पत्रकार है। ”
निसन्देह पत्रकार जलता है तभी सच्चाई उजागर होती है।परंतु पुलिस प्रशासन द्वारा प्रताड़ित पत्रकार की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?पुलिस,प्रशासन शासन ! इसका किसी के पास कोई जवाब नही है।क्योंकि सबसे ज़्यादा पत्रकारों का दोहन पुलिस तथा प्रशासन ही करता है और शासन मूक दर्शक बनकर नज़ारा देखता है।चाहे फिर पत्रकार को जलाकर मार दिया जाए,चाहे ट्रक से कुचलवा दिया जाए।लगभग तीन दशक से अधिक समय गुज़र जाने के बाद भी प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून का अभाव इसी बात को प्रमाणित करता है कि पुलिस प्रशासन और सरकार नही चाहते की पत्रकार सुरक्षित हो।
जब सम्पूर्ण मध्यप्रदेश का पत्रकार असुरक्षित है ऐसे समय में यदि भारतीय पत्रकारिता महोत्सव में पत्रकार सुरक्षा पर कोई बात न हो पीड़ा देती है। अपने हाथ अपनी पीठ थपथपा लेने से पत्रकारों का हित नही होगा ,यह विकट समय है जब पत्रकारों पर हो रहे हमले,अत्याचार, प्रताड़नाओं से मुक्ति के लिए शंखनाद की आवश्यकता है और हम शासन प्रशासन की वाह वाही कर अपने अधिकारों की रक्षा में कोताही बरत रहे हैं।निसन्देह मेरी मत ओर विचार से पत्रकारिता जगत का एक बहुत बड़ा वर्ग रुष्ट होगा,मुमकिन है मुझे अपमानित भी किया जाए,मुमकिन है मुझे पत्रकार भी न माना जाए।परन्तु मुझे इसकी कोई चिंता नही ।क्योंकि मेरा लक्ष्य केवल ओर केवल “पत्रकार सुरक्षा और कल्याण”है।और यही मेरे जीवन का अंतिम लक्ष्य है।
पत्रकार एकता ज़िंदाबाद।
(सैयद ख़ालिद क़ैस अध्यक्ष प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स)
*यह लेखक के निजी विचार है।
