आकाश उपध्याय ज़िला ब्यूरो अलीराजपुर जोबट की कलम से
जोबट – विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदिक आ रहा है वैसे-वैसे दोनो पार्टीयों माहौल गर्मता जा रहा है । आज हम बात कर रहे आलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा सीट की जहा एक तरफ अभी तक भाजपा द्वारा कीसी उम्मीदवार ने दावेदारी पेश नही की वही कांग्रेस की और से चार कार्यकर्ताओं श्रीमती सुलोचना रावत, विशाल रावत, सुश्री कलावती भुरीया व कमरू अजनार ने अपनी दावेदारी पेश कर दी है । जोबट विधानसभा के जोबट नगर मे कांग्रेस का एक गुट लगातार रावत परीवार का विरोध करता आ रहा है इनका विरोध इस कदर सीर चढा हुआ है की उनके लिये पार्टी की हार-जीत कोई मायने नही रखती है व इनकी जीद के कारण कांग्रेस पार्टी लगातर 15 से 20 वर्षो से यहा नगर परीषद चुनाव हारती आ रही है । सबके लिये एक बडा सवाल बन चुका है की क्या वास्वीकता में 7 हजार वोटरो वाली नगर परिषद के चुनावो में हार रहा यह गुट इतना मजबुत है की पुरी विधानसभा में यह कोई उलटफेर कर सकते है ? वैसे इस गुट को लेकर एक विशेष समुदाय में घोर विरोध है जिसके चलते भी यहा कांग्रेस को लगातार परीषद में हार का सामना करना पडता है । वर्ष 2013 के चुनावी परीणाम को देखते हुए वर्तमान में कांग्रेस पार्टी धरातल पर इतनी मजबुत नही है जोबट विधानसभा में नये चहरे के साथ कोई प्रयोग किया जा सके वैसे भी भाजपा के कुछ बुद्धीजीवीयो का यह मानना है की इस चुनाव में भाजपा को अगर कोई कडी टक्कर दे सकता है तो वो रावत परीवार अन्यथा कांग्रेस का यहा जितना मुश्किल है लेकिन अन्दर की बात माने तो भाजपा यह जरूर चाहती है की कैसे भी करके इस बार रावत परीवार को टिकट न मिले और इनकी जीत सुनिश्चत हो जाये ।
क्षेत्र में रावत परिवार का दबदबा –
आजादी के बाद से ही रावत परिवार जोबट विधानसभा से चुनाव लडता आ रहा है एवं कई कई बार विधायक पद इन्हे के पास रहा है । अगर हम इस परीवार की बात करे तो कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के अलावा भाजपा के बडे कार्यकर्ता भी इस परीवार के सदव्यवहार को नतमष्तक करता है । वही यह परिवार पुरी विधानसभा के हर नगर-हर गॉव के एक-एक मोहल्ले व फलिये में परीचित है साथ ही इनके राजनैतिक भविष्य में आज तक किसी भी प्रकार का किसी से भी विवाद दिखता नजर नही आया है । अगर हम बात करे 2003 के चुनाव की तो उस समय पुरे प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर के चलते दोनो जिलो की पांचो कांग्रेस की परम्परागत सीटे भाजपा की झोली में चली गई थी लेकिन 2008 के विधानसभा चुनाव में पुनः यहा कांग्रेस को सिकस्त देकर अपना कब्जा जमाया था । वही 2013 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदार के खडे होने के कारण कांग्रेसी वोटो पर बडी पेठ के चलते वे चुनाव हार गये व उक्त सीट भाजपा के खाते में चली गई । वर्तमान में आम जनता जीस प्रकार भाजपा की नितीयों एवं योजनाओं से परेशान है उसको देखते हुए इस बार के चुनाव के परीणाम भाजपा के लिये चौकाने वाले हो सकते है एसे में अगर कांग्रेस की जीती जिताई नगर परिषद में अध्यक्ष की सीट उम्मीदवार चुनने में की जो गलती के कारण उन्हे खोना पडी वैसी ही गलती अगर इस बार भी कांग्रेस ने की तो पुनः भाजपा इस मौके को भुनाने से पीछे नही हटेगी और कांग्रेस को पटखनी दे देगी इसलिये देखा जाये तो अभी कमजोर कांग्रेस के लिये किसी नये चहरे पर दाव लगाना खतरे से खाली नही है । क्योकि नये चहरे को टिकट देने पर कांग्रेस को चुनाव में हर क्षेत्र में अपने आप को मजबुत करना पडेगा साथ ही इनके लिये सबसे बरझर-कठ्ठीवाडा-भाभरा-जोबट-आम्बुआ तथा उदयगढ में बडी संख्या में रावत परिवार के समर्थक कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दुर करना भाजपा से चुनाव जीतने से भी बडी चुनोती होगी जो इस समय उचित नही है ।

*श्रीमती सुलोचना रावत*
◆परिवार एवं स्वय के वर्षो से चुनाव लडने के कारण क्षेत्र में शतप्रतिशत मतदाताओं के बीच परिचित ।
◆क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के बीच अच्छा तालमेल ।
◆प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर में एक ही बार 2003 चुनाव हारी है ।
◆विधानसभा क्षेत्र के हर ब्लॉक में बडी संख्या में हर समुदाय के समर्थक है ।
◆विधानसभा चुनाव के चलते समर्थको के साथ क्षेत्र में प्रतिदिन सक्रियता से कांग्रेस को मजबुत करने का काम किया जा रहा है ।
◆भाजपा के पास चुनाव प्रचार के समय इनके खिलाफ कोई व्यक्तिगत मुद्दा नही है ।
◆कभी भी संगठन के निर्णयों का विरोध नही किया ।
◆प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ एवं सिंधिया से वर्षो पुराने अच्छे संबध ।

*कलावती भुरीया*
◆अन्य जिले की होने के कारण मतदाताओं के बीच कोई खास परिचय नही ।
◆नगर के एक विषेश कांग्रेसी गुट के अलावा अन्य जगह कार्यकर्ता में पकड कमजोर ।
◆कांग्रेस से टिकट न मिलने पर विरोध स्वरूप झाबुआ से 2013 निर्दलीय चुनाव लडते हुए लगभग मात्र 18 हजार वोट ही ला सकी तथा स्वंय तो हारी लेकिन कांग्रेस को हराने में अहम भुमिका निभाई ।
◆विधानसभा के जोबट ब्लॉक में कुछ ही समर्थक है जिनका नगर में एक विशेष समुदाय में घोर विरोध है ।
◆विधानसभा चुनाव मे जोबट से भी दावेदारी के चलते गुटबाजी देखने को मिल रही है जिसके कारण कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड सकता है ।
◆भाजपा के पास चुनाव प्रसार के समय इनके अन्य जिले की होने का व्यक्तिगत मुद्दा बनाया जायेगा ।
◆2013 में टिकट नही मिलने पर संगठन के निर्णयों के विरूध निर्दलीय चुनाव लडा ।
◆सांसद कांतीलाल भूरीया के परीवारीक सबंध ।
