शेख नसीम@ 8770972604
भोपाल। आज के दौर में पत्रकारिता का स्तर को गिराने में सबसे बड़ा हाथ खुद पत्रकार का हैं अपनी पत्रकारिता में सिर्फ वो मुद्दे उछाले जाते हैं जिससे देश को नुकसान के सिवा कुछ नही मिलता हैं।
लेकिन इसी दौर में एन डी टी वी के पत्रकार रविश कुमार ने ऐसी निष्पक्ष पत्रकारिता की जिसका जवाब नही हैं अपनी पत्रकारिता में ज्वलनशील मुद्दे जैसे बेरोजगारी,अशिक्षा,भ्रष्टाचार और कानून का दुरुपयोग जैसे मुद्दे गंभीरता से उठाए और उनका जवाब सरकार से मांगा। रविश कुमार कभी भी किसी के दवाब में या किसी के बहाव में आकर पत्रकारिता नही करते बल्कि जो सच होता हैं उसे ही दिखाते हैं रविश कुमार न कभी केंद्र सरकार के दवाब में आए और न ही राज्य सरकार के दवाब में आए और न ही किसी राजनेता किसी गुंडे बदमाश और न ही पुलिस के दवाब में आए बल्कि बेबाकी से भारत के गंभीर मुद्दों को उठाया जिसके नतीजे में रविश कुमार को मैग्सेसे पुरस्कार का सम्मान दिया जा रहा हैं जिसके वो हकदार हैं।
आज भारत की जनता मीडिया को तरह तरह के नाम से संबोधित करती हैं कोई कहता हैं बिकाऊ मीडिया कोई कहता हैं गोदी मीडिया कोई कहता हैं अंधी और गूंगी मीडिया ये वो नाम हैं जो आज प्रचलन में हैं इसका ज़िम्मेदार कौन हैं आज टीवी पर देख लो सिर्फ हिन्दू,मुस्लिम से जुड़े मुद्दे ही उठते हैं कई कई घंटो उस पर मौलवी और पंडित को बुलाकर उनसे डीबेट की जाती हैं और एक दूसरे को कैसे लड़वाया जाता हैं ये आज की मीडिया के काम हैं टीवी डीबेट में ऐसा मुद्दा उठाकर लाएंगे जिससे देश को ज़र्रा बराबर भी फायदा नही पहुंचता बल्कि आपस मे नफरते और अदावतें बढ़ती हैं और एक दूसरे के मज़हब के प्रति बेर रखने की भावना उत्पन्न होती हैं।
इसीलिए पत्रकारिता के गिरते स्तर को उठाने की ज़िम्मेदारी हर पत्रकार की हैं और ये ज़िम्मेदारी तब पूरी होगी जब हम देश से जुड़े मद्दे गरीबो से जुड़े मुद्दे भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे शिक्षा से जुड़े मुद्दे कानून से जुड़े मुद्दे सबकी तरक्की और सबकी खुशहाली से जुड़े मुद्दे गरीबी से जुड़े मुद्दे रोजगार से जुड़े मुद्दे भुखमरी और बीमारी से जुड़े मुद्दे बेहतर कानून व्यवस्था और सबको बेहतर इलाज के मुद्दे पूरी शिद्दत और जोश के साथ उठाएंगे तो फिर पत्रकारिता के स्तर को उठा सकते हैं वर्ना बांटने का काम तो हो ही रहा हैं और भारत की जनता का विश्वास भी मीडिया के उठता जा रहा हैं।
