
सैयद ख़ालिद क़ैस की कलम से।
भोपाल। पिछले साल तक कॉंग्रेस के कद्दावर शीर्ष नेता कहलाने वाले राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया जबसे भाजपा के हुए तबसे भाजपा का कुनबा उनको लगातार हाशिये पर रखने पर आमादा रहता है। जो सम्मान उनको कॉंग्रेस में हासिल हुआ उससे ज़्यादा की उम्मीद लगाकर भाजपा का दामन थामने ओर प्रदेश की कमलनाथ सरकार को गिराने वाले सिंधिया जी का पिछले कई माह से मन व्याकुल चल रहा है।वह चहकर भी यह जता नही पा रहे कि भाजपा में आना उनकी गलती थी। उनकी उदासीनता ओर व्याकुलता का कारण है भाजपा के वह मठाधीश जो माधव राव सिंधिया ओर उसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को ग्वालियर में स्वीकार नहीं सकते है। लाख सिंधिया जी को उन्होंने भारी मन से भाजपा में स्वीकार लिया पर मन से अब तक अपना नेता नही स्वीकार पाये हैं।इधर भाजपा नेतृत्व भी सिंधिया जी पर अब इतनी तवज्जो नही दे रहा जितनी कमलनाथ सरकार गिराने के समय दी थी। एक वर्ष से अधिक समय से राजगद्दी की बाँट सजोये सिंधिया जी को केवल राज्यसभा सदस्य बनाकर भाजपा ने अपना पल्ला झाड़ लिया है।
भाजपा और सिंधिया के बीच रस्साकशी बंगाल चुनाव में उनको स्टार प्रचारक की सूची में लगभग अंतिम पंक्ति में अंतिम दौर में रखना, राज्यसभा में अंतिम पंक्ति में बिठाना ओर अब नया शगूफा सामने आने पर और तस्वीर साफ हो गई कि भाजपा ने सिंधिया को Use and Throw बना डाला है।
गौरतलब हो कि मध्यप्रदेश में होने वाले दमोह उपचुनाव के लिए बीजेपी से गुना सांसद केपी यादव चुनाव प्रचार कर रहे हैं। बीजेपी द्वारा केपी यादव को प्रचार में बुलाए जाने को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।पिछले लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराकर सांसद बने केपी यादव को ऐसे समय में प्रचार के लिए बुलाया गया है जब खबरें आ रही है कि पार्टी ने सिंधिया को चुनाव से दूर रहने का निर्देश दिया है।
चुनाव प्रचार में आने पर रोक लगाने की वजह से सिंधिया इतने खफा हो गए कि उन्होंने अपने अन्य कार्यक्रमों तक को रद्द कर दिए है। बीजेपी द्वारा केपी यादव को प्रचार में उतारने के बाद कांग्रेस को सिंधिया को घेरने का बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है।

कांग्रेस ने इस मामले पर तंज कसते हुए कहा है कि शिवराज के चूल्हे में नई राख दिख रही है। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट किया, ‘सिंधिया को हराने वाले गुना सांसद केपी यादव दमोह में प्रचार कर रहे हैं, और सिंधिया के दमोह प्रवेश पर प्रतिबंध है। “शिवराज के चूल्हे में नई राख दिख रही है”
माना जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा गद्दार और बिकाऊ करार दिए जाने के बाद सिंधिया की छवि को नकारात्मक मानते हुए बीजेपी चाहती है कि उनके बिना ही चुनाव प्रचार किया जाए। ताकि कांग्रेस को गद्दार और बिकाऊ वाले मुद्दे पर ज्यादा बोलने का मौका न मिल पाए।
ऐसे में यह साफ़ ज़ाहिर हो गया है कि भाजपा के लिए “सिंधिया गुड़ भरा हसिया हो गया है जो न उगलने का ओर निगलने का”
