सिंधिया ने ट्वीटर के माध्यम से शिवराज और उनकी सरकार पर तीखें वार किए है। सिंधिया ने कहा कि मप्र की कानून व्यवस्था जंगलराज से भी बदतर हो गयी है। उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से लिखा है कि देखिए भाजपा सरकार का स्वर्णिम मध्यप्रदेश- जहाँ न हमारे दलित भाई-बहन सुरक्षित है, न मातृशक्ति और न ही किसान। भोपाल की इस घटना ने साबित कर दिया है कि मप्र की कानून व्यवस्था जंगलराज से भी बदतर हो गयी है।
वही उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा है कि कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इनमें से एक आरोपी भाजपा पिछड़े वर्ग का पदाधिकारी है। इस कृत्य की जितनी निंदा की जाए, वह कम है – मध्यप्रदेश सरकार को इनके खिलाफ तत्काल सख्त कार्यवाही करनी चाहिए।
बता दे कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ इस घटना की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।कांग्रेस इस दो सदस्यों के दल को बैरसिया भेजेगी और सच्चाई का खुद पता लगाएगी। इस दल में कैलाश मिश्रा और आसिफ जकी को शामिल किया गया है और जिम्मेदारी दी है कि वे बैरसिया जाएं और घटनाक्रम की पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर भेंजें।
गौरतलब है कि गुरुवार को 70 साल के दलित किसान किशोरीला , पत्नी तंखिया के साथ खेत पर पहुंचे तो देखा कि दबंग तीरन, उसका बेटा प्रकाश, भतीजे संजू और बलबीर खेत को ट्रैक्टर से जोत रहे थे। किसान ने जब उनका विरोध किया तो उन चारों ने उसे धमकाना शुरु कर दिया। बार बार विरोध करने पर चारों दबंगों प्रकाश, संजू और बलबीर और एक साथ और ने मिलकर किसान के हाथ-पैर पकड़ लिए और पेट्रोल डाल कर जिंदा जला दिया। घटना में 90 फीसदी तक जल गए किसान ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। घटना के बाद आरोपित मौके से फरार हो गए, जिन्हें गिरफ्तार करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सरकारी अस्पताल में करीब पांच घंटे भारी हंगामा किया। बताया जा रहा है कि किसान ने अपनी पट्टे की जमीन को जोत रहे दबंगों का विरोध किया था। हालांकि पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या, खेत पर कब्जे की कोशिश और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया और देर रात चारों आरोपियों को गांव के पास से ही हिरासत में ले लिया है। इसके बाद एसडीएम राजीवनंदन श्रीवास्तव की मौजूदगी में परिजनों ने किशोरीलाल का खेत में अंतिम संस्कार किया। फिलहाल तनाव को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही चारों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।
