बिलासपुर। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने विनोद दुआ,धवल पटेल, सिद्धार्थ वर्धराजन, व उत्तरप्रदेश छत्तीसगढ़ और हिमांचल प्रदेश में दर्ज प्रथमिकता की कड़ी निंदा की व धमकी देने’ और प्रेस की स्वतंत्रता में ‘कटौती’ को लेकर चिंता जताई है और सरकारों से अपील की है सुचिता कायम रखे ।
बीते कुछ वर्षों में राज्य एवं केंद्र सरकारों के द्वारा लगातार पत्रकारों को निशाना बनाया जारहा है । आपातकाल के नाम पर यह मामला और बढ़ गया है । सवाल पूछने वाले , सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ने वाले , अल्पसंख्यकों की आवाज को बुलंद करने वालो और सरकार नाकामियों को उजागर करने वालो को सरकार चुन चुन कर निशाना बना रही है।
भारत में राजद्रोह के पहले मुकदमे की कहानी से लेकर वर्तमान परिदृश्य में यह कोई नई घटना नही है और न ही पहली घटना है । आज से 129 साल पहले भी एक पत्रकार जोगेंद्र चंद्र बोस राजद्रोह का मुकदमा दायर हुआ था ।
मामला ब्रिटिश सरकार के ख़िलाफ़ लिखने का है। ब्रिटिश सरकार ने बालविवाह को लेकर एक कानून बनाया जिसमें बालविवाह की उम्र बढ़ा कर 10 से 12 साल कर दी जिसके खिलाफ अखबार के संपादक जोगेंद्र चंद्र बोस ने लगातार अपने साप्ताहिक अखबार में खबरे प्रकशित की इन्ही खबरों से खिन्न होकर बिर्तानिया हुकूमत ने संपादक जोगेंद्र चंद्र बोस व अन्य जिम्मेदार लोगों को पर राजद्रोह का मुकदमा दायर किया।
आज के सरकारों का रवैया क्या बिर्तानिया हुकूमत से से भिन्न है ?
ऐसा ही विनोद दुवा के साथ हुआ भाजपा के प्रवक्ता नवीन कुमार की शिकायत पर शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ कथित तौर पर ‘‘सार्वजनिक गड़बड़ी पैदा करने वाले बयान देने’’ के लिए प्राथमिकी दर्ज कराई है।
अपराध शाखा को दी गई शिकायत में कुमार ने दुआ पर आरोप लगाया कि वह यूट्यूब पर ‘‘द विनोद दुआ शो’’ के माध्यम से ‘‘फर्जी सूचनाएं फैला’’ रहे हैं औऱ दंगो दौरान ‘‘गलत रिपोर्टिंग’’ करने के आरोप भी लगाया। जिस पर पुलिस भादंसं की धारा 290, 505 और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
विनोद दुवा का मामला कोई अकेला मामला नही है । सिद्धार्थ वरदराजन पर आरोप है कि उन्होंने तब्लीगी जमात की हरकतों के बचाव में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का गलत उद्धरण दिया था।
वरदराजन के खिलाफ दो अलग-अलग जगहों पर मामला दर्ज किया गया है। पहला मामला फैजाबाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 505 (2) के तहत दर्ज किया गया है, वहीं दूसरा मामला अयोध्या में धारा 188 और 505 (2) व आईटी एक्ट के 66D के तहत मामला दर्ज ही नही कराया गया बल्कि सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा धमकाया गया कि केश लड़ने के लिए भी चंदा माँगना पड़ेगा ।
क्या नेतृत्व परिवर्तन की खबर लिखने मात्र से राजद्रोह का मुकदमा दायर किया जा सकता है ?
हाल में ही गुजरात के एक समाचार पोर्टल के संपादक के खिलाफ राजद्रोह का मामला महज इसलिए दर्ज कर लिया कि
उन्होंने अपने पोर्टल पर खबर चलाई थी कि भाजपा आलाकमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के स्थान पर केंद्रीय मंत्री मंसुख मंडाविया को मुख्यमंत्री बना सकता है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अहमदाबाद अपराध शाखा ने ‘फेस ऑफ नेशन ‘ समाचार पोर्टल के संपादक धवल पटेल के खिलाफ शुक्रवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (राजद्रोह) और आपदा प्रबंधन केश दर्ज किया है।
सूत्रों की माने तो धवल पटेल के खिलाफ इस लिए मुक़दमा दर्ज किया गया कि वो गुजरात सरकार और उनके कॉर्पेशन के खिलाफ लगतार भ्रष्टाचार उजागर कर रहे थे इसी से विचलित होकर संपादक धवल पटेल के खिलाफ़ राजद्रोह और आपदा प्रबंधन के धाराओ के तहत एफ आई आर दर्ज किया गया।
खबर लिखे जाने को लेकर धमकाया जारहा है पत्रकारों को….
अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार महेंद्र सिंह मनराल से दिल्ली पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने और उन पर आपराधिक मुकदमा चलाने की धमकी देने का भी आरोप लगा है ।
बड़े पत्रकारों के साथ – साथ जिलों और ब्लाक स्तर के पत्रकार भी इस छूत की बीमारी से अछूते नही है
हिमांचलप्रदेश में छ पत्रकारों के खिलाफ कथित तौर पर प्राथमिकियां दर्ज कीगई । उत्तरप्रदेश के बुलन्द शहर के पत्रकार हरि अंगिरा, पतेहपुर के पत्रकार अजय भदौरिया या फिर सीतापुर के रविन्द्र सक्सेना का मामला हो इन सभी ने सरकार के खामियों को उजगार करने का कार्य किया है ।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा का कहना है कि उत्तरप्रदेश,गुजरात और दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई बहुत ज्यादा चिंतित करने वाली बात है। सरकार और पुलिस को यह समझना चाहिए कि मीडिया किसी भी लोकतंत्र में शासन संरचना का एक अभिन्न अंग है। अगर आप सारी घटनाओं पर गौर करे तो देखेंगे कि इन सभी जगह विशेष ,विचारधारा की सरकारे है और मुकदमा दर्ज करने पैटन भी एक जैसा ही है ।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने इन सभी घटनाओं की कड़ी निंदा की है और राज्य तथा केंद्र सरकारों को स्वतंत्र प्रेस को धमकाने के लिए कानून का दुरुपयोग रोकने की मांग करता है साथ ही साथ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से अपील करता हैं कि मामले को संज्ञान में ले और भरोसा स्थापित करे की ऐसी घटनाओं की पुनःवृत्ति नही होगी

राकेश प्रताप सिंह परिहार
लेखक- अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (भारत) के राष्ट्रीय संगठन महासचिव हैं व् सम्पूर्ण भारत में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने के लिए संघर्षरत हैं।
