गाडरवारा -शहर का पुण्य उदय हुआ और लोगों को घर बैठे नर्मदा जल मिल जाएगा सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी लेकिन यह पुण्य का कार्य कितनी ईमानदारी से किया जा रहा है इसे पूरा शहर देख रहा है और बातें कर रहा है।अब चूंकि आम जनता तो सिर्फ काम को देखकर बातें करके भूल जाती है इसलिये इन्ही सब बातों को मीडिया के लोग जिम्मेदारों के सामने लाने के लिये अपनी कलम चलाते हैं लेकिन फिर भी योजना का काम उसके लिये बनाई गई प्रोजेक्ट रिपोर्ट और कार्य कर रही कम्पनी से किये गए अनुबन्ध के अनुसार ना हो तो इसे क्या समझा जाये यह सवाल लोगों के जहन में कई तरह के सवाल तो जरूर पैदा करता है।
इस योजना का काम कर रही कम्पनी क्यों मनमाने ढंग से काम करती चली जा रही है और काम करा रहे जनप्रतिनिधि अधिकारी, कर्मचारी, और वो एजेंसी क्यों सब कुछ चुपचाप देखती रहती है तो थोड़ा इसे भी समझ लिया जाए ।दरअसल इस तरह की योजनाएं बड़े पैमाने पर बनाई जाती हैं और बड़ी रकम इन योजनाओं हेतु स्वीकृत होती हैं ऐसे में देश भर के लिये बनी इन योजनाओं के ठेके भी बड़े बड़े लोग लेते हैं जिनके सम्बंध कहीं ना कहीं सत्ता से जुड़े हुये होते हैं।और काम करा रहा सिस्टम इन्ही के नीचे काम करता है तो फिर काम से जनता को परेशानी हो काम गुणबत्ता पूर्ण ना हो यह सब सिस्टम देखकर कर भी इसे अनदेखा करता रहता और कभी मजबूरी बस इस पर कहीं कोई कार्यवाही की भी गई तो यह कार्यवाही जांच के बिंदु पर आकर टिक जाती है और इस देश में जांच का मतलब होता क्या है इसे आमजनता भली भांति समझती है।उक्त योजना में चल रहे कार्य का जायजा लेने जब हमारी टीम मौके पर पहुँची तो मौके से नगरपालिका के जिम्मेदार कर्मचारी व इंजीनियर नदारद पाए गए जिससे आप अंदाजा लगा सकते है कि कितनी सजगता से यह कार्य हो रहा है ।
इस महत्वपूर्ण योजना का कार्य देर रात्रि में क्यो कराया जा रहा है और किसके आदेश से हो रहा है ,दूसरी महत्वपूर्ण बात जो सामने आई उसमें जिस कम्पनी के कर्मचारी द्वारा नाबालिकों से कार्य क्यों कराया जा रहा है ? मौके पर मौजूद कर्मचारी को कतई ज्ञान नही था कि यह कार्य किस विधी से होना है,जब उससे पूछा गया कि यह कार्य किस आधार पर हो रहा है तो उसका दो टूक शब्दों में यही कहना था कि मुझे इस बारे में कुछ नही पता इसके बारे में ऑफिस से पता कीजिये,,,,तो फिर ये जनाब इधर क्या कर रहे है,,,?
आलम यह था कि जब नाबालिकों से कार्य करा रहे कम्पनी के सुपरवाइजर से पूछा तो उसका कैमरे के सामने बोलने का अंदाज ही इतना डरावना था जिससे साफ यह लगता है कि ये गरीब नाबालिग बच्चों को डरा धमका कर काम लेते रहते है । मतलब पहिले तो चोरी ऊपर से सीनाचोरी कर रहे है,,,हालत यह है कि सारे कार्य मनमर्जी से हो रहें है न तो पाईप लाइन डालने के लिए नाली की खुदाई का कोई पैमाना है न ही उस पर डाली जाने बाली मुरम का और न ही उन पाइपों की गुणबत्ता का जो डीपीआर के अनुसार होना चाहिये था ।
उक्त सन्दर्भ में जब मौके पर मौजूद पार्षद से इस कार्य के बारे में पूछा गया तो साफ तौर पर पार्षद ने इस कार्य को गुणवत्ता हीन बताते हुए नगरपालिका से जांच करके सही कार्य करने की मांग की ।यहाँ तक कि जब नगरपालिका सीएमओ से जब उक्त कार्य के बारे में सवाल किया गया तो उनका कहना था कि अभी तो कार्य सही हो रहा है,यदि कहीं गलत हो रहा है तो हम उसकी जाँच करेंगे । आमतौर पर आम जनता का कहना है कि नर्मदा जल लाने की योजना के काम में लगातार की जा रही अनिमितताये साफ दिख रही है।आगे देखना यह है कि क्या इन सरकारी योजनाओं की ऐसे ही बंदरबांट चलती रहेगी या फिर प्रशासन कुम्भकर्णीय नींद से जाग कर कुछ कार्यवाही करेगा कि नही ?
