बैतूल23अप्रैल।।वामन पोटे।।सरकार चाहे किसी भी दल की हो पर कबाड़ी सरकार का कबाड़ा खुले आम बेच रहे है ।सरकारी स्टोर रूम में सरकार का कबाड़ा ही नही है ।मतलब साफ है कि कही नही कहि सरकारी मशनरी भी यहाँ शामिल है पीएचई विभाग हो या फिर पीडब्ल्यूडी विभाग हो यहाँ का पुराना लोहा कबाड़ियों की दुकान तक पहुचकर बिक रहा है ।वही भारीभरकम टेक्स के बाद वाहन खुलेआम टुकड़े टुकड़े किये जा रहे है जिससे सरकार के राजस्व की भी हानि हो रही है ।वाहनों में मॉडल कंडीशन लागू होने के बाद खुले आम यह धंधा जारी है ।
शहर में चोरी के वाहनों को कबाड़ी दुकानों में लगाया जाता है ठिकाना
शहर में इन दिनों चोरी के वाहनों को ठिकाना लगाने का कार्य धड़ल्ले के साथ किया जा रहा है। पुलिस के आंखों के नीचे कबाड़ी दुकानों की आड़ में इस गोरख धंधे का संचालन किया जा रहा है। शहर में कुकुरमुत्ता की तरह दर्जनों कबाड़ी की दुकान खुली हुई है। कहने के लिए तो दुकान पुराने कबाड़ खरीदने व बेचने की बताया जाता है। पर दुकान के अंदर जो भी गोरख करनामा होते हैं उन्हें देखकर लोग दंग रह जाते हैं। इन कबाड़ी की दुकान में प्रतिदिन बडे वाहनों से लेकर छोटे वाहनों को काटने का कार्य किया जाता है। आखिर इन कबाड़ वालों के पास प्रतिदिन काटने के लिए इतनी संख्या में वाहन कहां से आते हैं। यहां कटने वाले वाहन केवल बैतूल शहर के ही नहीं बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से चोरी कर लाया जाता है। यहां लाने के बाद वाहनों को गैस कटर से काटकर पुर्जे -पुर्जे को अलग कर दिया जाता है और उसे बेच दिया जाता है।
कैसा संचालित होती है कबाड़ी की दुकान :
शहर में खुले कबाड़ी की दुकानों की नहीं कोई अनुमति है और ना ही उनके द्वारा सरकार को किसी प्रकार का टैक्स दिया जाता है। वाहनों को काटने का कारोबार प्रतिबंधित है। फिर भी पुलिस के अधिकारियों एवं सफेदपोश के रसूक के कारण यह गोरख कारोबार फल-फूल रहा है। वाहन चोरों का गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है। जहां से वाहनों को चोरी करके यहां तक पहुंचा देते हैं। यहां आने के साथ ही घंटे भर में काट काट कर उस के पुर्जे- पुर्जे को अलग अलग कर दिया जाता है। जिससे वह कभी भी पकड़ में नहीं आते हैं। लग्जरी कारों का ट्रकों में लादकर यहां पर लाया जाता है ताकि रास्ते में वाहनों की चेकिंग कर रही पुलिस को भी पता ना चल सके। नहीं टोल प्लाजा पर लाई जा रहे वाहनों को पास कराना पड़े एवं उनकी कैमरे की वीडियो फुटेज में उसकी तस्वीर आ सके।
प्रत्येक वर्ष सरकार को करोड़ों रुपया राजस्व का लगा रहे चूना कबाड़ी दुकान।
सरकार के राजस्व एवं फाइनेंसर को लगाते हैं चुना कबाड़ी की दुकानों में वैसे भी वाहनों को काटा जाता है। जिस पर परिवहन विभाग का लाखों रुपया राजस्व बकाया होता है। वाहन मालिक वाहनों को सड़क पर चलाते हैं। जब उस वाहन पर भारी भरकम टैक्स हो जाता है तो उसे इन कबाड़ी वालों के हाथ बेच देते हैं। वहीं दूसरी तरफ नई-नई गाड़ियों को भी काट दिया जाता है। जिनके ऊपर बैंक एवं प्राइवेट फाइनेंसर के लाखों रुपए का कर्ज बकाया होता है। वैसे मालिक वाहनों को चलाकर कमाई तो कर लेते हैं। परंतु वाहन को खरीदते समय बैंकों से प्राप्त किया गया कर्ज चुकता नहीं करते हैं और जब बैंक एवं फाइनेंसर उनके ऊपर कर्ज की राशि चुकता करने के लिए दबाव बनाते हैं तो उस वाहन को लाकर इन कबाड़ी वालों के हाथ में बेच दिया जाता है।
पुलिस द्वारा नहीं होती है कार्रवाई शहर में खुले कबाड़ी दुकानों की जांच पुलिस द्वारा नहीं की जाती है । जिससे क्या पता चले की यहां पर चोरी या कर्ज बकाया वाली वाहनों को काटकर खपाने का कार्य किया जाता है। जब वाहन चोरी करने वाले गिरोह सक्रिय होते हैं तो केवल सड़कों पर पुलिस चेकिंग कर खानापूर्ति कर देती है पर इन कबाड़ी दुकानों की जांच नहीं करती है। चोरी हुआ वाहन यहां पहुंच जाते है पहले पुलिस द्वारा कबाड़ी दुकानों पर विशेष अभियान चलाया गया था । जिसके तहत शहर के सभी कबाड़ी दुकानें बंद हो गए थे। परंतु कुछ दिनों बाद ही कबाड़ कारोबारी फिर से सक्रिय हो गए हैं और आज तक गोरखधंधे को करते आ रहे हैं। वाहनों को काटने से पूर्व वाहन मालिक को उक्त वाहन को लेकर जिला परिवहन पदाधिकारी के समक्ष सरेंडर करना पड़ता है।
