भोपाल गैस कांड: 33 साल बाद आज भी खतरा बना हुआ है 346 टन जहरीला कचराभोपाल गैस कांड: 33 साल बाद आज भी खतरा बना हुआ है 346 टन जहरीला कचराभोपाल गैस कांड को 33 साल हो चुके हैं। इतना लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद आज भी नष्ट नहीं हो पाया 346 टन जहरीला कचरा।
भोपाल, [राजीव सोनी]। दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में शुमार भोपाल गैस कांड के 33 साल बाद भी यूनियन कार्बाइड कारखाने में 346 टन जहरीला कचरा मौजूद है। इस जहरीले केमिकल को नष्ट करने का निर्णय ही नहीं हो पा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इंदौर के पास पीथमपुर में 10 टन कचरे का निष्पादन प्रयोग के बतौर किया गया, लेकिन इस कवायद का पर्यावरण पर कितना दुष्प्रभाव हुआ, इसकी रिपोर्ट का खुलासा होना बाकी है। बचे हुए जहरीले कचरे को कैसे ठिकाने लगाया जाए, इसे लेकर सरकार आज भी धर्मसंकट में है।
पर्यावरण से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मसले पर सरकार का कहना है कि उसके पास जहरीले कचरे को निपटाने की सुविधाएं और विशेषज्ञ नहीं है। यह जहरीला कचरा यूनियन कार्बाइड कारखाने के ‘कवर्ड शैड’ में रखा गया है। कचरे का आधिपत्य प्रदेश के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के पास है। त्रासदी के करीब साढ़े तीन दशक बाद भी पर्यावरण पर खतरे की तलवार लटकी हुई है। मध्य प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का मुंह ताक रही है।
