सबसे ईमानदार विभाग राजस्व विभाग में सूचना का अधिकार का आवेदन जाते ही होली के सारे रंग चेहरों से उड़ गये
छतरपुर । मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की महाराजपुर तहसील सीमांकन दिनांक दिनांक 4 मार्च हल्का गोरारी मैं सीमांकन के निशान को देखकर लग रहा है कि तहसील महाराजपुर का कुछ हिस्सा किसी दूसरे की जमीन है।
आर आई गढ़ी मलेहरा के सीमांकन के लगये गाये निशानो की जानकारी हमें भी मिली जाकर आर आई से पूछा मालूम हुआ बिना तहसीलदार के पूछे मुंह नहीं खोलेंगे साहब और उड़न छू हो गए तहसीलदार साहब की बात आई तो साहब भी चुप हो गए वैसे दो तहसीलदार पदस्थ हैं महाराजपुर तहसील में पर तहसील से 15 मीटर 50 मीटर दूर हरे भरे पेड़ की कटाई हो रही है महोदय कहते हैं फॉरेस्ट को बताया कि नहीं। पर बात हम सीमांकन की करें तो डाली गई कलई बताती है तहसील महाराजपुर का सेंटर रूम ही सीमांकन में आ गया आखिर चल क्या रहा है महाराजपुर तहसील में शासकीय जमीन में अतिक्रमण के मामले में बार-बार होना कौन करेगा कार्यवाही क्या यही अधिकारी सीमांकन करते तो कितना सही होता है।

हरे हरे वृक्ष की कटाई के मामले में बात करें तो महाराजपुर तहसील के अंदर लगे होर्डिंग बताते हैं कि आर सी एम एस के 24 नंबर पर लिखे नियम के मुताबिक किसी भी वृक्ष को काटने के स्वीकृति की जरूरत होती है पर तहसीलदार आनंद जैन तो कुछ बोलने को तैयार ही नहीं है।

महाराजपुर एवं गढ़ी मलेहरा सर्किल में हो रहे शासकीय भूमि पर अतिक्रमण आर आई के सीमांकन कई सवाल खड़े करता है। जिस में तहसील महाराजपुर की जमीन ही अगर प्राइवेट लोगों के सीमांकन में फंसती नजर आई तो योग्यता पर भी बात आएगी जरूर क्या बार-बार सीमांकन के मापदंड अलग-अलग रहते हैं। मेरे द्वारा दिया गया आवेदन भी काफी प्रयासों के बाद सूचना का अधिकार महाराजपुर तहसील में कुछ खसरा नंबरों एवं हरे वृक्षों की प्रजाति की जानकारी के साथ पहुंचा तो पहले तो तहसीलदार आनंद जैन की उपस्थिति में कार्यालय में सूचना का अधिकार प्रभारी ने मार्क करने को कहा जिसके लिए महोदय ने दूसरे सर्किल की बात होने पर पदस्थ दूसरी तहसीलदार के यहां भेजा पर मार्क करने के मामले में दूसरे तहसीलदार का भी रवैया कुछ अलग ही रहा काफी गहमागहमी के बाद आवेदन आनंद जैन ने ही मार्क किया पर प्रथा यह असंवैधानिक ही है जो सूचना के अधिकार के लिए लागू नहीं होती है।
MP /Chhatarpur@खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता)
