भोपाल । पिछले 15 साल की भाजपा नीत सरकार ने सूचना अधिकार अधिनियम की दशा और दिशा मेँ इतना परिवर्तन कर दिया । क़ानून मेँ इतने संशोधन कर दिए कि अब क़ानून बेमानी लगने लगा । वर्तमान हालात मेँ आरटीआई क़ानून अस्तित्वहीन हो गया है । प्रशासनिक तंत्र द्वारा खुल्लमखुल्ला खिलवाड़ ने रही सही कसर को पूर्ण कर दिया । एक्ट मेँ बेवजह हुऐ संशोधन और पिछले मुख्य सूचना आयुक्त व उनके साथी और अधीनस्थ जिस पर आरटीआई क़ानून का जनाजा निकालकर गए हैँ उसके नतीजे मेँ लालफीताशाही , अफसरशाही और भ्रष्ट तंत्र निरंकुश हुआ । जिसके परिणाम नज़र आ रहें हैँ । ऐसा ही एक मामला हमारे साथी और आरटीआई एक्टिविस्ट कौंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय पदाधिकारी खेमराज चौरसिया ने उजागर किया । पूरी कहानी उन्ही की ज़ुबानी ………
22 किलोमीटर दूर पत्र को पहुँचने मैं लगे 60 दिन पुलिस अधीक्षक छतरपुर का बन्द लिफ़ाफ़े का पत्र
सूचना के अधिकार का भगवान ही मालिक है।
मध्य प्रदेश/ छतरपुर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा भेजे गए बन्द लिफाफा के पत्र को जो कि आज दिनांक 18/ 6/ 2019 को थाना महाराजपुर से प्राप्त हुआ पर खोलने के बाद देखा कि पत्र बहुत पुराना है जिसकी मैं पुलिस अधीक्षक छतरपुर से भी अपील कर चुका हूं पुलिस अधीक्षक छतरपुर का पत्र क्रमांक कृ-अपुअ/रीडर/सू0अ0/ 117/19 दिनांक 18/ 4/2019 का निकला है और मामला भी बहुत राष्ट्रीय प्रेम भरा था राष्ट्रीय ध्वज के दुरुपयोग करने के संबंध में दिए गए आवेदन पर आज दिनांक तक एफ आई आर दर्ज नहीं हुई तो एक आरटीआई एसपी कार्यलय छतरपुर को लगा दी पर 22 किलोमीटर कि दूरी तय करने में पत्र को 60 दिन लग गये पर शुक्र है कि 60 दिन में ही सही पत्र सही सलामत पहुँच ही गया…
✍MP//छतरपुर//महाराजपुर :-संवाददाता:-खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता)
